Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023
धारा 130
Official communications
No public officer shall be compelled to disclose communications made to him in official confidence, when he considers that the public interests would suffer by the disclosure.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान पुराने Indian Evidence Act, 1872 की धारा 124 से आया है, जो औपनिवेशिक शासन के दौरान उन संप्रेषणों की गोपनीयता की रक्षा के लिए लिखा गया था जो अधिकारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन में प्राप्त होते हैं—जैसे गुप्तचर रिपोर्टें, आंतरिक टिप्पणियाँ, या संवेदनशील पत्राचार। विचार यह था कि अधिकारी प्रायः विश्वास के साथ सूचना प्राप्त करते हैं, और हर मुकदमे में प्रकटीकरण को बाध्य करना लोगों को सरकार से बेबाक जानकारी साझा करने से हतोत्साहित कर सकता है, या संवेदनशील राज्य मामलों को उजागर कर सकता है। यह प्रावधान न्यायालयों की साक्ष्य-आवश्यकता और शासन में कार्यपालिका की गोपनीयता-आवश्यकता के बीच संतुलन बनाता है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
न्यायालयों ने सामान्यतः ऐसे आधिकारिक-विशेषाधिकार दावों (चाहे इस धारा के तहत हों या राज्य दस्तावेज़ों पर संबंधित प्रावधान के तहत) को निरपेक्ष नहीं माना है। न्यायाधीशों ने कहा है कि जब कोई सार्वजनिक अधिकारी या सरकार ऐसा विशेषाधिकार मांगती है, तो अदालतें यह परख सकती हैं कि दावा वास्तविक है या नहीं, और क्या वाकई लोकहित, प्रकटीकरण से मिलने वाले न्यायहित पर भारी पड़ता है—सिर्फ अधिकारी के कथन को स्वतः स्वीकार नहीं किया जाता। लोक-हित प्रतिरक्षा (public-interest immunity) पर सर्वोच्च न्यायालय की व्यापक चर्चाएँ, जैसे S.P. Gupta v. Union of India (1982), ने पुष्ट किया कि गोपनीयता के दावे न्यायिक जांच के अधीन हैं और उन्हें कदाचार छिपाने या जवाबदेही से बचने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह धारा सार्वजनिक अधिकारियों को अपनी मनचाही कोई भी जानकारी छिपाने की पूर्ण स्वतंत्रता देती है—यह कथन गलत है।
तथ्य: न्यायालयों ने माना है कि ऐसे विशेषाधिकार दावों की न्यायाधीश समीक्षा कर सकते हैं, और अधिकारी इसे कदाचार छिपाने या वैध कानूनी जांच से बचने के लिए उपयोग नहीं कर सकते।
मिथक: यह प्रावधान सभी सरकारी दस्तावेज़ों पर लागू होता है—यह कथन गलत है।
तथ्य: यह विशेष रूप से उन संप्रेषणों से संबंधित है जो किसी सार्वजनिक अधिकारी को आधिकारिक गोपनीयता में किए गए हों, न कि सभी आधिकारिक अभिलेखों से (अप्रकाशित राज्य दस्तावेज़ों पर एक संबंधित परन्तु अलग सुरक्षा लागू होती है)।