Bharatiya Sakshya Adhiniyam, 2023
धारा 117
Presumption as to abetment of suicide by a married woman
When the question is whether the commission of suicide by a woman had been abetted by her husband or any relative of her husband and it is shown that she had committed suicide within a period of seven years from the date of her marriage and that her husband or such relative of her husband had subjected her to cruelty, the Court may presume, having regard to all the other circumstances of the case, that such suicide had been abetted by her husband or by such relative of her husband. Explanation.—For the purposes of this section, “cruelty” shall have the same meaning as in section 86 of the Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान भारतीय साक्ष्य क़ानून में 1986 में पहली बार लाए गए नियम (पुराने साक्ष्य अधिनियम की धारा 113A) की निरंतरता है, जो दहेज मृत्यु और नवविवाहित स्त्रियों के साथ क्रूरता के व्यापक संकट के प्रति प्रतिक्रिया के रूप में आया था। क्योंकि ऐसे मामले प्रायः बंद दरवाज़ों के पीछे होते हैं, उकसावे का प्रत्यक्ष प्रमाण मिलना कठिन होता है। विधायकों ने साक्ष्यगत बोझ का कुछ हिस्सा स्थानांतरित किया—जब क्रूरता और विवाह के सात वर्षों के भीतर आत्महत्या सिद्ध हो जाए—तो न्यायालयों को उकसावे का अनुमान लगाने की अनुमति देकर, ताकि पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की राह कुछ आसान हो, जबकि दोषसिद्धि से पहले न्यायालय को समग्र परिप्रेक्ष्य पर विचार करना अभी भी आवश्यक रहे।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
पूर्ववर्ती प्रावधान (Indian Evidence Act, 1872 की धारा 113A) के अंतर्गत न्यायालयों ने स्पष्ट किया था कि यह अनुमान वैकल्पिक है, अनिवार्य नहीं — ‘may presume’ का आशय है कि न्यायाधीशों को परिस्थितियों का समग्र मूल्यांकन करना होता है, न कि स्वतः अनुमान लगा देना। न्यायालयों ने माना है कि केवल क्रूरता और सात वर्षों के भीतर आत्महत्या सिद्ध हो जाने से अपने आप दोषसिद्धि नहीं हो जाती; एक युक्तिसंगत कड़ी दिखनी चाहिए कि क्रूरता स्त्री को आत्महत्या की ओर ले जा सकती थी। उच्च न्यायालयों ने यह भी रेखांकित किया है कि अभियुक्त प्रतिकूल अनुमान को विपरीत साक्ष्य देकर खंडित कर सकता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यदि पत्नी विवाह के सात वर्षों के भीतर आत्महत्या कर ले और कोई भी क्रूरता हुई हो, तो पति स्वतः अपराधी है।
तथ्य: न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमान विवेकाधीन होता है (‘may presume’), स्वतः लागू नहीं। न्यायाधीश को सभी परिस्थितियों पर विचार करना होता है, और अभियुक्त अब भी साक्ष्य देकर इस अनुमान का खंडन कर सकता है।
मिथक: यह प्रावधान ‘क्रूरता’ की परिभाषा स्वयं स्वतंत्र रूप से देता है।
तथ्य: स्पष्टीकरण बताता है कि ‘क्रूरता’ का अर्थ इस धारा से नहीं, बल्कि भारत न्याय संहिता, 2023 की धारा 86 से लिया जाएगा।