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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 509

Non-compliance with provisions of section 183 or section 316

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

इक़रार दर्ज करने की विस्तृत प्रक्रिया जबरन या गढ़े हुए बयानों से सुरक्षा हेतु बनी है; परंतु कोई छोटी प्रक्रियात्मक चूक, यदि उसने वास्तविक अन्याय न किया हो, तो किसी सच्चे व स्वैच्छिक इक़रार को अपने-आप निरस्त नहीं कर देनी चाहिए। यह प्रावधान तब तकनीकी अपालन-त्रुटि को नज़रअंदाज़ करने देता है जब बयान की वास्तविक सामग्री और उसकी स्वैच्छिकता पर सचमुच संदेह न हो। यह पूर्ववर्ती दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 463 के अनुरूप है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

समतुल्य दंड प्रक्रिया संहिता प्रावधान के अधीन न्यायालयों ने सामान्यतः माना है कि यह धारा केवल दर्ज करने की प्रक्रिया में औपचारिक या तकनीकी त्रुटियों को ही ठीक कर सकती है; ऐसे मौलिक दोष, जो स्वयं इक़रार की स्वैच्छिकता पर प्रहार करते हों, इसका उपचार क्षेत्र नहीं हैं—यदि यह वास्तविक संदेह हो कि अभियुक्त ने बयान स्वेच्छा से दिया था या नहीं, तो इस धारा के तहत उस इक़रार को बचाया नहीं जा सकता।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: इक़रार दर्ज करने में कोई भी प्रक्रियात्मक गलती होते ही उसे स्वतः साक्ष्य से बाहर कर दिया जाता है।

    तथ्य: यदि अपालन नगण्य हो, अभियुक्त के बचाव को क्षति न पहुँचाता हो और इक़रार वास्तव में व स्वेच्छा से दिया गया हो, तो उसे माफ़ किया जा सकता है; परंतु स्वैच्छिकता पर गंभीर संदेह इस तरीके से दूर नहीं किए जा सकते।