Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023
धारा 47
Person arrested to be informed of grounds of arrest and of right to bail
(1) Every police officer or other person arresting any person without warrant shall forthwith communicate to him full particulars of the offence for which he is arrested or other grounds for such arrest.
(2) Where a police officer arrests without warrant any person other than a person accused of a non- bailable offence, he shall inform the person arrested that he is entitled to be released on bail and that he may arrange for sureties on his behalf.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान एक लंबे समय से चला आ रहा सुरक्षा-कवच है (पहले दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 50 में निहित), जिसकी जड़ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) में निहित संवैधानिक गारंटी में है, जो कहती है कि किसी भी गिरफ़्तार व्यक्ति को गिरफ़्तारी के आधार बताने के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इसका उद्देश्य पुलिस द्वारा मनमानी या गुप्त निरोधन को रोकना है और यह सुनिश्चित करना है कि व्यक्ति अपनी स्थिति तुरंत समझ सके तथा अपनी स्वतंत्रता की रक्षा हेतु—जैसे ज़मानत माँगना या परिवार/वकीलों को सूचित करना—ज़रूरी कदम उठा सके।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने—जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने Joginder Kumar v. State of U.P. (1994) तथा D.K. Basu v. State of West Bengal (1997) जैसे मामलों में—ज़ोर देकर कहा है कि गिरफ़्तार व्यक्ति को गिरफ़्तारी के आधार और उसके अधिकारों की जानकारी देना केवल औपचारिकता नहीं बल्कि अनुच्छेद 22(1) से जुड़ा अनिवार्य सुरक्षा-कवच है। अनुपालन न होना एक गंभीर प्रक्रिया-संबंधी त्रुटि माना गया है, जो गिरफ़्तारी और निरोधन की वैधता को प्रभावित कर सकती है, और ग़लत गिरफ़्तारी के मामलों में ज़मानत देने या मुआवज़ा देने का आधार बनी है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: पुलिस किसी को गिरफ़्तार कर सकती है और कारण बाद में, सुविधा होने पर, बता सकती है।
तथ्य: क़ानून मांग करता है कि कारण ‘फौरन’ बताए जाएँ—अर्थात गिरफ़्तारी के समय ही, बाद में नहीं।
मिथक: पुलिस आपको केवल तब ही कारण बताने की पाबंद है जब आप पूछें।
तथ्य: यह दायित्व स्वतः लागू होता है और गिरफ़्तार व्यक्ति द्वारा कारण पूछने पर निर्भर नहीं है।
मिथक: हर गिरफ़्तार व्यक्ति को ज़मानत की जानकारी दिए जाने का स्वतः अधिकार है।
तथ्य: इस धारा के तहत ज़मानत संबंधी सूचना देने का विशिष्ट दायित्व केवल तब लागू होता है जब अपराध जमानती हो; गैर-जमानती अपराधों के लिए यह दायित्व नहीं है।