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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 340

Right of person against whom proceedings are instituted to be defended

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

पुरानी दंप्रसि (CrPC) की धारा 303 की यह व्यवस्था भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(1) के अंतर्गत विधिक सहायता/प्रतिनिधित्व के संवैधानिक अधिकार को ठोस वैधानिक रूप देती है, ताकि आरोपित व्यक्ति कभी पूरी तरह अकेले आपराधिक मुक़दमे का सामना न करें और वे अपने भरोसे के अधिवक्ता को चुन सकें।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह अधिकार यह नहीं कहता कि सरकार आरोपित की पसंद का कोई भी वकील अपनी जेब से दे।

    तथ्य: यह धारा अपनी पसंद के वकील से बचाव कराने का अधिकार सुनिश्चित करती है; राज्य-वित्तपोषित विधिक सहायता, जो एक अलग व्यवस्था है, तभी लागू होती है जब आरोपित वास्तव में वकील का ख़र्च वहन करने में असमर्थ हो।