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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 341

Legal aid to accused at State expense in certain cases

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान निष्पक्ष सुनवाई के संवैधानिक अधिकार और निर्धनों के लिए विधिक सहायता के अधिकार को व्यवहार में उतारता है, यह मानते हुए कि बिना बचाव वकील के मुकदमा प्रायः निष्पक्ष नहीं होता। यह उस विचार को आगे बढ़ाता है, जिसे भारतीय न्यायालयों ने 1970–80 के दशक से प्रबल रूप से विकसित किया है कि न्याय तक पहुँच किसी व्यक्ति की भुगतान-क्षमता पर निर्भर नहीं हो सकती।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

भारतीय न्यायालयों, जिनमें सर्वोच्च न्यायालय भी शामिल है, ने बार-बार कहा है कि निःशुल्क विधिक सहायता निष्पक्ष सुनवाई और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है, और निर्धन अभियुक्त को वकील उपलब्ध न कराना मुकदमे को दूषित कर सकता है। यह धारा ट्रायल न्यायालय स्तर पर उस संवैधानिक आश्वासन को लागू करने वाली वैधानिक कार्यप्रणाली है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: निःशुल्क विधिक सहायता वाले वकील स्वतः ही पारिश्रमिक पाने वाले वकीलों से बदतर होते हैं।

    तथ्य: विधिक सहायता वाले वकील सामान्य अधिवक्ता ही होते हैं, जो उच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए नियमों के अंतर्गत सूचीबद्ध/नामांकित होते हैं और पारिश्रमिक पाते हैं; उनकी गुणवत्ता व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करती है, न कि फीस कौन देता है इस पर।