Skip to content
सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 138

Commencement of period for which security is required

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सुरक्षा संबंधी आदेश (जैसे शांति बनाए रखने या अच्छे आचरण का बंधपत्र) भविष्य में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए होते हैं। यदि कोई व्यक्ति पहले से सज़ा भुगत रहा है, तो सुरक्षा-अवधि को उसी के साथ-साथ चलाना व्यर्थ होगा—क्योंकि जेल में रहते हुए वह किसी को खतरा नहीं पहुँचा सकता, और सुरक्षा का उद्देश्य रिहाई के बाद के समय को कवर करना है, जब वास्तविक जोखिम पैदा होता है। यह प्रावधान (पुराने दंड प्रक्रिया संहिता के धारा 127 से आगे बढ़ाया गया) सुनिश्चित करता है कि सुरक्षा बंधपत्र का रक्षात्मक उद्देश्य जेल की सज़ा के साथ ओवरलैप होकर व्यर्थ न हो जाए।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतों ने इसे सामान्यतः एक सीधा, यांत्रिक प्रावधान माना है जो यह सुनिश्चित करता है कि सुरक्षा-अवधि कारावास के दौरान निष्फल चलने के बजाय व्यवहार में प्रभावी रहे। इस विशिष्ट समय-नियम की अलग से व्याख्या करने वाले बड़े नज़ीरनुमा फैसलों का कोई व्यापक समूह नहीं है, क्योंकि यह मुख्यतः प्रक्रिया-संबंधी है और हर मामले के तथ्यों पर लागू होता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: सुरक्षा-अवधि हमेशा उसी दिन से शुरू होती है जिस दिन मजिस्ट्रेट आदेश पारित करता है।

    तथ्य: यह तभी सही है जब व्यक्ति इस समय कोई कारावास की सज़ा नहीं काट रहा हो। यदि वह पहले से जेल में है, तो सुरक्षा-अवधि उसकी रिहाई के बाद तक टाल दी जाती है।

  • मिथक: उपधारा (2) के अंतर्गत मजिस्ट्रेट कभी भी प्रारंभ-तिथि को टाल नहीं सकता।

    तथ्य: मजिस्ट्रेट आदेश-तिथि से बाद की कोई प्रारंभ-तिथि तय कर सकता है, परन्तु केवल तब, जब उसके पास पर्याप्त कारण हो।