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सं Samvidhan

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023

धारा 115

Assistance in relation to orders of attachment or forfeiture of property

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

अपराध की आय—खासकर संगठित अपराध, भ्रष्टाचार और वित्तीय धोखाधड़ी से—अक्सर सीमाएँ पार कर जाती है या विदेश में संपत्ति में बदल दी जाती है। पुराने भारतीय दंड प्रक्रिया क़ानून में अदालतों द्वारा संदिग्ध संपत्ति को फ्रीज़ करने या अंतरराष्ट्रीय सहयोग करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। BNSS (2023) में, जिसने पुराने CrPC का स्थान लिया, जोड़ा गया यह अनुभाग एक संरचित प्रक्रिया गढ़ता है—अंतरराष्ट्रीय परस्पर विधिक सहायता (mutual legal assistance) की प्रथाओं का प्रतिबिंब—ताकि भारत देश के भीतर अपराध-जन्य संपत्ति पर कार्रवाई कर सके और ‘संविदा राज्य’ (contracting States) यानी पारस्परिक संधि-व्यवस्था वाले देशों के साथ मिलकर, जहाँ भी ऐसी परिसंपत्तियाँ हों, उनका पता लगाकर उन्हें फ्रीज़/ज़ब्त कर सके।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: भारतीय न्यायालय विदेशी देश में स्थित संपत्ति को सीधे ही ज़ब्त कर सकते हैं।

    तथ्य: वे विदेश में भौतिक रूप से कार्रवाई नहीं कर सकते; उन्हें उस देश की अदालत या प्राधिकरण को औपचारिक ‘अनुरोध-पत्र’ भेजना पड़ता है, और वहाँ का निकाय अपने क़ानूनों के अनुसार उस आदेश का पालन करने-न करने का निर्णय लेता है।

  • मिथक: यह अनुभाग किसी भी विदेशी देश पर अपने-आप लागू होता है।

    तथ्य: यह केवल ‘संविदा राज्यों’—वे देश जिनके साथ भारत का ऐसा सहयोग-संबंधी समझौता या व्यवस्था है—पर लागू होता है।