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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 155

Receiving property taken by war or depredation mentioned in sections 153 and 154

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

धारा 153 और 154 उन व्यक्तियों को दंडित करती हैं जो भारत के साथ शांतिपूर्ण संबंध रखने वाले किसी विदेशी देश के क्षेत्र में लूटपाट या छापेमारी का आयोजन करते हैं या उसमें भाग लेते हैं, क्योंकि ऐसे कृत्य भारत को अंतरराष्ट्रीय टकराव में घसीट सकते हैं या संधियों का उल्लंघन कर सकते हैं। धारा 155 एक कमी को भरती है: भले किसी व्यक्ति ने स्वयं छापे में हिस्सा न लिया हो, लूट का माल जानते-बूझते प्राप्त करना या उससे लाभ उठाना भी उसे सहभागी बनाता है। यह ऐसे अवैध आक्रमणों में चोरी किए गए माल के काले बाजार को हतोत्साहित करता है और शांतिपूर्ण पड़ोसी राज्यों पर हमला करने के लिए भारत के क्षेत्र या नागरिकों के दुरुपयोग की रोकथाम संबंधी भारत के अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को मजबूत करता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: केवल वही व्यक्ति दंडित किया जा सकता है जिसने वास्तविक छापा या चोरी की हो।

    तथ्य: जो कोई बाद में जानते-बूझते उस चोरी की संपत्ति को प्राप्त करता है या अपने पास रखता है, उसे भी इस धारा के तहत दंडित किया जा सकता है, भले उसने मूल अपराध में भाग न लिया हो।

  • मिथक: यदि आपको पक्का पता नहीं था कि माल चोरी का है, तो आप स्वतः ही सुरक्षित हैं।

    तथ्य: कानून यह मांग करता है कि ऐसी ‘जानकारी’ हो कि संपत्ति इस प्रकार के अपराध में ली गई थी; अदालतें इसका आकलन आस-पास की परिस्थितियों और तथ्यों के आधार पर करती हैं, न कि केवल अभियुक्त के अज्ञान के दावे पर।