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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 156

Public servant voluntarily allowing prisoner of State or war to escape

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान औपनिवेशिक काल के Indian Penal Code (Section 128) से आया है और Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में जारी रखा गया है। इसका उद्देश्य राज्य के क़ैदियों और युद्धबंधियों की अभिरक्षा की अखंडता की रक्षा करना है—ये ऐसी श्रेणियाँ हैं जो राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों (जैसे POWs के लिए Geneva Conventions) से निकटता से जुड़ी हैं। यह क़ानून ऐसे अभिरक्षा-कार्य में नियुक्त लोक सेवकों पर कड़ी सतर्कता का दायित्व डालता है, क्योंकि उनकी जानबूझकर की गई विफलता राज्य की सुरक्षा, कूटनीतिक संबंधों, या लोक व्यवस्था को ख़तरे में डाल सकती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह क़ानून किसी भी जेल से किसी भी क़ैदी के भागने पर लागू होता है।

    तथ्य: यह विशेष रूप से ‘राज्य के क़ैदियों’ और ‘युद्धबंधियों’ पर लागू होता है, न कि सामान्य आपराधिक संदिग्धों या सजायाफ़्ता व्यक्तियों पर।

  • मिथक: लापरवाही से भागने का पता न चलना और जानबूझकर भागने देना—दोनों को समान दंड दिया जाता है।

    तथ्य: इस धारा के तहत दंड के लिए आवश्यक है कि लोक सेवक ‘स्वेच्छा से’ भागने की अनुमति दे—दुर्घटनावश या लापरवाही से हुई चूक अलग, कम कठोर प्रावधान के अंतर्गत आती है।