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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 251

संसद् द्वारा अनुच्छेद 249 और अनुच्छेद 250 के अधीन बनाई गई विधियों और राज्यों के विधान-मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति

संसद् द्वारा अनुच्छेद 249 और अनुच्छेद 250 के अधीन बनाई गई विधियों और राज्यों के विधान-मंडलों द्वारा बनाई गई विधियों में असंगति — अनुच्छेद 249 और अनुच्छेद 250 की कोई बात किसी राज्य के विधान-मंडल की ऐसी विधि बनाने की शक्ति को, जिसे इस संविधान के अधीन बनाने की शक्ति उसको है, निबंधित नहीं करेगी किंतु यदि किसी राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि का कोई उपबंध संसद् द्वारा बनाई गई विधि के, जिसे उक्त अनुच्छेदों में से किसी अनुच्छेद के अधीन बनाने की शक्ति संसद् को है, किसी उपबंध के विरुद्ध है तो संसद् द्वारा बनाई गई विधि अभिभावी होगी चाहे वह राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि से पहले या उसके बाद में पारित की गई हो और राज्य के विधान-मंडल द्वारा बनाई गई विधि उस विरोध की मात्रा तक अप्रवर्तनीय होगी किंतु ऐसा तभी तक होगा जब तक संसद् द्वारा बनाई गई विधि प्रभावी रहती है ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

अनुच्छेद 249 और 250 संसद को राज्य सूची के विषयों पर अस्थायी रूप से कानून बनाने की अनुमति देते हैं—अनुच्छेद 249 तब, जब राज्यसभा किसी विषय को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करती है, और अनुच्छेद 250 राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान। ये सामान्य संघीय शक्तिविभाजन से अपवाद हैं और अस्थायी रूप से ही लागू होते हैं। अनुच्छेद 251 स्पष्ट करता है कि इस अवधि में राज्यों की विधि-निर्माण शक्ति समाप्त नहीं होती; वे अब भी कानून बना सकते हैं। यह मात्र टकराव का समाधान करता है—संसद के अस्थायी कानून को प्राथमिकता देता है, पर उस कानून की अवधि तक ही सीमित। जैसे ही राज्यसभा का प्रस्ताव समाप्त होता है या आपातकाल खत्म होता है, राज्य का कानून पूर्ण रूप से फिर से प्रभावी हो जाता है। इससे संघवाद सुरक्षित रहता है, क्योंकि राज्य विषयों में केंद्रीय दखल अस्थायी रहता है और राज्य की विधायी क्षमता स्थायी रूप से समाप्त नहीं होती।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: एक बार संसद अनुच्छेद 249 या 250 के तहत कानून बना दे, तो राज्य उस विषय पर स्थायी रूप से कानून बनाने की शक्ति खो देता है।

    तथ्य: राज्य की विधायी शक्ति बनी रहती है; केवल जहां-जहां राज्य कानून का संसद के विशेष कानून से टकराव है, वे हिस्से तब तक अस्थायी रूप से निष्प्रभावी रहते हैं जब तक संसद का विशेष कानून प्रभावी है।

  • मिथक: ऐसा कोई राज्य कानून जो इस तरह के संसदीय कानून से टकराता है, सदा के लिए शून्य हो जाता है।

    तथ्य: राज्य का कानून केवल टकराव की सीमा तक निलंबित रहता है—जैसे ही संसद का अनुच्छेद 249/250 वाला कानून प्रभावहीन होता है, वह अपने आप फिर से जीवित हो जाता है।