The Constitution of India
अनुच्छेद 239A
कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए स्थानीय विधान-मंडलों या मंत्रि-परिषदों का या दोनों का सृजन
कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए स्थानीय विधान-मंडलों या मंत्रि-परिषदों का या दोनों का सृजन— (1) संसद्, विधि द्वारा 45पुडुचेरी] संघ राज्यक्षेत्र के लिए,] — (क) उस संघ राज्यक्षेत्र के विधान-मंडल के रूप में कार्य करने के लिए निर्वाचित या भागतः नामनिर्देशित और भागतः निर्वाचित निकाय का; या (ख) मंत्रि-परिषद् का, या दोनों का सृजन कर सकेगी, जिनमें से प्रत्येक का गठन, शक्तियां और कृत्य वे होंगे जो उस विधि में विनिर्दिष्ट किए जाएं । (2) खंड (1) में निर्दिष्ट विधि को, अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन इस बात के होते हुए भी नहीं समझा जाएगा कि उसमें कोई ऐसा उपबंध अंतर्विष्ट है जो इस संविधान का संशोधन करता है या संशोधन करने का प्रभाव रखता है ।]
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
पुदुच्चेरी (पूर्व नाम पांडिचेरी), जो एक पूर्व फ़्राँसीसी उपनिवेश था, चरणबद्ध रूप से भारत में विलय हुआ (वास्तविक नियंत्रण 1954, वैध-अधिकार 1962)। राज्यों के विपरीत, संघ राज्य क्षेत्रों का संचालन सामान्यतः केंद्र सरकार सीधे करती है। परंतु पुदुच्चेरी की विशिष्ट पहचान और जन-आकांक्षा के कारण संसद स्थानीय, निर्वाचित सरकार चाहती थी। संविधान (चौदहवाँ संशोधन) अधिनियम, 1962 द्वारा जोड़ा गया अनुच्छेद 239A संसद को यह लचीलापन देता है कि वह साधारण विधेयक से वहाँ विधायिका और मंत्रिपरिषद बना सके—हर बार स्वयं संविधान में संशोधन करने की जरूरत न पड़े। इसी शक्ति का उपयोग करते हुए संसद ने Government of Union Territories Act, 1963 अधिनियमित किया, जिसने पुदुच्चेरी की विधान सभा और मंत्रिपरिषद स्थापित की।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अनुच्छेद 239A की गहन व्याख्या पर कोई विख्यात सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सीधे नहीं है, परंतु न्यायालयों ने बार‑बार रेखांकित किया है कि इसके तहत बनी संघ राज्य क्षेत्र की विधायिका, भाग VI के अंतर्गत राज्य विधानमंडल के समान नहीं है—उसकी शक्तियाँ उतनी ही हैं जितनी संसद के कानून से मिलती हैं, और संसद उस कानून को कभी भी बदल या निरस्त कर सकती है। पुदुच्चेरी की निर्वाचित सरकार और उसके उपराज्यपाल के बीच निर्णयाधिकार को लेकर हुए विवादों में न्यायालयों ने Supreme Court के Government of NCT of Delhi v. Union of India (2018) निर्णय (जो समान संरचना वाले अनुच्छेद 239AA का अर्थ स्पष्ट करता है) की तर्कपद्धति का सहारा लिया, सहकारी संघवाद और सीमित परंतु वास्तविक जन-शासित कार्यक्षेत्र की पुष्टि की, साथ ही संघ राज्य क्षेत्र की अधीनस्थ संवैधानिक स्थिति भी स्पष्ट की।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि पुदुच्चेरी की विधानसभा का संवैधानिक दर्जा और शक्तियाँ किसी राज्य की विधानमंडल के समान हैं।
तथ्य: यह संसद के साधारण कानून द्वारा अनुच्छेद 239A के अंतर्गत निर्मित एक संघ राज्य क्षेत्र की विधायिका है; इसकी शक्तियाँ उतनी ही हैं जितनी वह कानून देता है, और संसद उन्हें बदल या निरस्त कर सकती है।
मिथक: क्योंकि यह कानून संवैधानिक‑प्रकार की व्यवस्थाओं में परिवर्तन कर सकता है, इसलिए इसे अनिवार्यतः अनुच्छेद 368 की विशेष संशोधन प्रक्रिया से ही गुजरना चाहिए—यह कथन गलत है।
तथ्य: उपधारा (2) स्पष्ट रूप से कहती है कि ऐसे कानूनों को, भले उनका प्रभाव वैसा हो, संवैधानिक संशोधन नहीं माना जाएगा; अतः सरल, साधारण विधि‑निर्माण प्रक्रिया ही लागू होती है।