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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 240

कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए विनियम बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति

कुछ संघ राज्यक्षेत्रों के लिए विनियम बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति— (1) राष्ट्रपति— (क) अंदमान और निकोबार द्वीप; 3(ख) लक्षद्वीप;] 4(ग) दादरा और नागर हवेली और दमण और दीव;] 5(घ)****;] 6(ङ) 7पुडुचेरी];] 198(च)* * * * 209(छ)* * * * संघ राज्यक्षेत्र की शांति, प्रगति और सुशासन के लिए विनियम बना सकेगा: 10परंतु जब 7पुडुचेरी] संघ राज्यक्षेत्र के लिए विधान-मंडल के रूप में कार्य करने के लिए अनुच्छेद 239क के अधीन किसी निकाय का सृजन किया जाता है तब राष्ट्रपति विधान-मंडल के प्रथम अधिवेशन के लिए नियत तारीख से उस संघ राज्यक्षेत्र की शांति, प्रगति और सुशासन के लिए विनियम नहीं बनाएगा:] 1. संविधान (अड़तीसवां संशोधन) अधिनियम, 1975 की धारा 4 द्वारा (भूतलक्षी प्रभाव से) खंड (4) अंतःस्थापित किया गया संविधान (चवालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1978 की धारा 32 द्वारा (20-6-1979 से) लोप किया 1परंतु यह और कि जब कभी 2पुडुचेरी] संघ राज्यक्षेत्र के विधान-मंडल के रूप में कार्य करने वाले निकाय का विघटन कर दिया जाता है या उस निकाय का ऐसे विधान-मंडल के रूप में कार्यकरण, अनुच्छेद 239क के खंड (1) में निर्दिष्ट विधि के अधीन की गई कार्रवाई के कारण निलंबित रहता है तब राष्ट्रपति ऐसे विघटन या निलंबन की अवधि के दौरान उस संघ राज्यक्षेत्र की शांति, प्रगति और सुशासन के लिए विनियम बना सकेगा ।] (2) इस प्रकार बनाया गया कोई विनियम संसद् द्वारा बनाए गए किसी अधिनियम या 3किसी अन्य विधि] का, जो उस संघ राज्यक्षेत्र को तत्समय लागू है, निरसन या संशोधन कर सकेगा और राष्ट्रपति द्वारा प्रख्यापित किए जाने पर उसका वही बल और प्रभाव होगा जो संसद् के किसी ऐसे अधिनियम का है जो उस राज्यक्षेत्र को लागू होता है ।]

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

जिन संघ शासित क्षेत्रों को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं है, विशेषकर छोटे या दूरस्थ क्षेत्र जैसे अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह या लक्षद्वीप, वहाँ प्रायः अपनी चुनी हुई विधायिका नहीं रही। संविधान निर्माताओं को ऐसी व्यवस्था चाहिए थी कि बिना पूर्ण राज्यीय विधायिका के भी इन क्षेत्रों में कानून और शासन सुचारु रूप से चल सके। अनुच्छेद 240 राष्ट्रपति को (संघ मंत्रिपरिषद की सलाह पर) इन क्षेत्रों के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है, जिसका प्रभाव संसद के कानून जैसा होता है, ताकि प्रशासनिक निरंतरता और व्यवस्था बनी रहे।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

न्यायालयों ने सामान्यतः अनुच्छेद 240 के तहत बनाए गए विनियमों को पूर्ण विधायी शक्ति युक्त माना है, जो संसद के कानूनों के समतुल्य हैं; अर्थात उन्हें उन्हीं आधारों पर चुनौती दी जा सकती है जिन पर सामान्य कानूनों को (जैसे मूल अधिकारों का उल्लंघन), पर केवल इस कारण ख़ारिज नहीं किया जा सकता कि वे ‘कार्यपालिका’ के आदेश हैं। न्यायिक निर्णयों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुदुच्चेरी जैसे संघ शासित क्षेत्र में जब अनुच्छेद 239A के तहत चुनी हुई विधायिका क्रियाशील हो जाती है, तो राष्ट्रपति की अनुच्छेद 240 वाली शक्ति विधिसंगत रूप से स्थगित हो जाती है—जिससे यह संवैधानिक व्यवस्था पुष्ट होती है कि जहाँ निर्वाचित निकाय मौजूद हों, वहाँ राष्ट्रपति के विनियम-निर्माण के बजाय वही प्रमुख हों।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: अनुच्छेद 240 के तहत बनाए गए विनियम असली कानूनों से कमजोर होते हैं, जैसे अनौपचारिक कार्यपालिका आदेश।

    तथ्य: जारी होते ही इन विनियमों को संसद अधिनियम के बराबर वैधानिक शक्ति प्राप्त होती है और वे उस क्षेत्र के लिए लागू मौजूदा संसदीय कानूनों को भी अधिरोहित कर सकते हैं।

  • मिथक: राष्ट्रपति पुदुच्चेरी के लिए हमेशा विनियम बना सकते हैं।

    तथ्य: यह शक्ति पुदुच्चेरी की चुनी हुई विधायिका (अनुच्छेद 239A के तहत) के कार्य करना शुरू करते ही निष्क्रिय हो जाती है, और केवल तब पुनर्जीवित होती है जब वह विधायिका भंग या निलंबित कर दी जाए।

  • मिथक: दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव आज भी अलग-अलग संघ शासित क्षेत्र हैं।

    तथ्य: उन्हें 2020 में एक ही संघ शासित क्षेत्र में मिला दिया गया, यद्यपि उन्हें अलग-अलग सूचीबद्ध करने वाला संवैधानिक पाठ औपचारिक रूप से अद्यतन नहीं हुआ है।