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सं Samvidhan

The Constitution of India

अनुच्छेद 196

विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध

विधेयकों के पुरःस्थापन और पारित किए जाने के संबंध में उपबंध— (1) धन विधेयकों और अन्य वित्त विधेयकों के संबंध में अनुच्छेद 198 और अनुच्छेद 207 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई विधेयक विधान परिषद् वाले राज्य के विधान-मंडल के किसी भी सदन में आरंभ हो सकेगा । (2) अनुच्छेद 197 और अनुच्छेद 198 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, कोई विधेयक विधान परिषद् वाले राज्य के विधान-मंडल के सदनों द्वारा तब तक पारित किया गया नहीं समझा जाएगा जब तक संशोधन के बिना या केवल ऐसे संशोधनों सहित, जिन पर दोनों सदन सहमत हो गए हैं, उस पर दोनों सदन सहमत नहीं हो जाते हैं । (3) किसी राज्य के विधान-मंडल में लंबित विधेयक उसके सदन या सदनों के सत्रावसान के कारण व्यपगत नहीं होगा । (4) किसी राज्य की विधान परिषद् में लंबित विधेयक, जिसको विधान सभा ने पारित नहीं किया है, विधान सभा के विघटन पर व्यपगत नहीं होगा। (5) कोई विधेयक, जो किसी राज्य की विधान सभा में लंबित है या जो विधान सभा द्वारा पारित कर दिया गया है और विधान परिषद् में लंबित है, विधान सभा के विघटन पर व्यपगत हो जाएगा ।

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

जिन राज्यों में द्विसदनीय विधानमंडल है (विधानसभा और विधान परिषद), वहाँ यह आवश्यक है कि स्पष्ट नियम हों—विधेयक दोनों सदनों में कैसे चलेगा, कब उसे विधिवत पारित माना जाएगा, और सत्र समाप्त होने या विधानसभा भंग होने पर लंबित विधेयकों का क्या होगा। निर्माताओं ने यह ढांचा ब्रिटिश संसदीय परंपरा और Government of India Act, 1935 से लेकर भारत के संघीय एवं द्विसदनीय राज्य ढांचे के अनुरूप ढाला, और धन विधेयकों के लिए अलग व्यवस्था रखी (जिन पर प्रभावी नियंत्रण केवल विधानसभा का होता है, प्रति अनुच्छेद 198 और 207)।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: विधेयक हमेशा हर सत्र समाप्त होते ही मर जाता है।

    तथ्य: अनुच्छेद 196(3) कहता है कि केवल स्थगनावसान (सत्र समाप्ति) के कारण विधेयक लैप्स नहीं होता; वह अगले सत्र में जारी रह सकता है।

  • मिथक: विधानसभा के भंग होने पर विधानमंडल के हर लंबित विधेयक का अंत हो जाता है।

    तथ्य: विधानसभा द्वारा पारित और केवल परिषद में लंबित विधेयक भंग होने पर भी बचा रहता है (अनुच्छेद 196(4)); केवल वे विधेयक लैप्स होते हैं जो अभी विधानसभा में या उसके समक्ष लंबित हों (अनुच्छेद 196(5)).

  • मिथक: सभी विधेयकों पर दोनों सदनों के समान अधिकार होते हैं, धन विधेयकों सहित।

    तथ्य: स्वयं अनुच्छेद 196(1) स्पष्ट करता है कि धन विधेयक और अन्य वित्तीय विधेयक अनुच्छेद 198 और 207 के अधीन विशेष नियमों का पालन करते हैं, जहाँ विधान परिषद की भूमिका सीमित होती है।