Indian Penal Code, 1860
धारा 9
repealedNumber
Unless the contrary appears from the context, words importing the singular number include the plural number, and words importing the plural number include the singular number.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह सामान्य व्याख्या-नियम मानक मसौदा-प्रथा से लिया गया है (जैसा कि General Clauses Act, 1897 की Section 13 में है)। विधायन हर शब्द के एकवचन–बहुवचन के सभी रूप अलग-अलग गिनाकर नहीं लिख सकता। इसलिए धारा 9 जोड़ी गई ताकि अदालतें और नागरिक केवल इसलिए न उलझें या छिद्रान्वेषण न कर सकें कि किसी प्रावधान में ‘एक व्यक्ति’ लिखा है ‘व्यक्तियों’ नहीं, या ‘वस्तु’ लिखा है ‘वस्तुएँ’ नहीं। यह सुनिश्चित करता है कि संख्या चाहे एक हो या अधिक, कानून तर्कसंगत रूप से लागू रहे, जब तक प्रसंग किसी एकवचन-भर या बहुवचन-भर की सख्त पढ़त की मांग न करे।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने सामान्यतः इस धारा को विधिक व्याख्या के सामान्य-बुद्धि वाले औज़ार के रूप में प्रयोग किया है, अपराध-परिभाषाओं में एकवचन और बहुवचन को परस्पर विनिमेय मानते हुए—जब तक कि किसी धारा की विशिष्ट भाषा या अभिप्राय स्पष्ट रूप से केवल एक ही संख्या की ओर इशारा न करे (उदाहरण के लिए, वे प्रावधान जो खास तौर पर एक ही पीड़ित या एक ही कृत्य से संबंधित हों)। इस नियम को पलट देने वाला कोई बड़ा नज़ीर-निर्णय नहीं है; इसे पृष्ठभूमि के व्याख्यात्मक सिद्धांत के रूप में नियमित और निर्विवाद ढंग से लागू किया जाता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यदि किसी कानून में ‘किसी व्यक्ति’ कहा गया है, तो वह कभी भी अनेक व्यक्तियों से जुड़े अपराध पर लागू नहीं हो सकता।
तथ्य: धारा 9 यह स्पष्ट करती है कि एकवचन शब्दों में बहुवचन भी सम्मिलित है (और बहुवचन में एकवचन भी), जब तक प्रसंग स्पष्ट रूप से केवल एक ही अर्थ की मांग न करे; इसलिए इस तरह की तकनीकी दलीलें प्रायः विफल हो जाती हैं।