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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 10

repealed

Man and Woman

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

उन्नीसवीं शताब्दी में तैयार किए गए आईपीसी को साधारण शब्दों के सटीक अर्थ निश्चित करने की जरूरत थी, ताकि ‘पुरुष’ या ‘स्त्री’ से संबंधित अपराध (जैसे मारपीट, अपहरण, या स्त्रियों के विरुद्ध अपराध) पीड़ित या अपराधी की आयु की परवाह किए बिना स्पष्ट रूप से लागू हों। इस स्पष्टीकरण के बिना, न्यायालय यह बहस कर सकते थे कि ‘पुरुष’ या ‘स्त्री’ केवल वयस्कों को ही दर्शाते हैं, जिससे सामान्य तौर पर स्त्रियों या पुरुषों की रक्षा के लिए बनी धाराओं के अधीन बच्चे असुरक्षित रह जाते।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: आईपीसी में ‘पुरुष’ और ‘स्त्री’ केवल वयस्कों को संदर्भित करते हैं।

    तथ्य: धारा 10 स्पष्ट रूप से कहती है कि ये शब्द ‘किसी भी आयु’ के नर और मादा को शामिल करते हैं, इसलिए बच्चे भी इसमें सम्मिलित हैं।

  • मिथक: यह अनुभाग अपने आप में अधिकार या अपराध पैदा करता है।

    तथ्य: धारा 10 केवल शब्दों की परिभाषा देती है; यह स्वयं कोई अपराध या दंड निर्मित नहीं करती—यह उन अन्य धाराओं की व्याख्या में सहायता करती है जो ‘पुरुष’ या ‘स्त्री’ शब्द का प्रयोग करती हैं।