Indian Penal Code, 1860
धारा 76
repealedAct done by a person bound, or by mistake of fact believing himself bound, by law
Nothing is an offence which is done by a person who is, or who by reason of a mistake of fact and not by reason of a mistake of law in good faith believes himself to be, bound by law to do it.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
भारतीय दंड संहिता (IPC) के निर्माताओं ने, अंग्रेजी सामान्य विधि के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए, उन लोगों—विशेषकर सैनिक, पुलिसकर्मी या जल्लाद जैसे अधिकारियों—की रक्षा करना चाही जो सद्भावना में, अपने युक्तिसंगत समझे गए कानूनी कर्तव्य का पालन करते हैं। यह प्रावधान ईमानदार तथ्यात्मक भूल (जो आचरण को क्षम्य बना सकती है) और कानून की अज्ञानता (जो सामान्य सूक्ति ‘कानून की अज्ञानता क्षम्य नहीं’ के अनुसार क्षम्य नहीं) के बीच भेद करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों ने अपने माने गए कानूनी दायित्व का सद्भावना में अनुपालन किया है, उन्हें अपराधी की तरह दंडित न किया जाए।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
भारतीय न्यायालयों ने, एक शास्त्रीय उदाहरण—वरिष्ठ अधिकारी के वैध आदेश पर दंगा कर रही भीड़ पर सैनिक द्वारा गोली चलाना—का सहारा लेते हुए, यह ठहराया है कि गलत विश्वास सद्भावना में और युक्तिसंगत दोनों होना चाहिए; मात्र ईमानदार या लापरवाह होना पर्याप्त नहीं। न्यायालयों ने धारा 76 को धारा 79 (तथ्य की भूल के कारण कृत्य का औचित्य) से अलग बताया है: धारा 76 तब लागू होती है जब कर्ता यह मानता है कि वह कानूनी रूप से ऐसा करने के लिए बाध्य है, जबकि धारा 79 तब जब कर्ता यह मानता है कि उसका कृत्य कानूनी रूप से औचित्यपूर्ण है। निर्णयों ने जोर दिया है कि भूल तथ्यों से संबंधित हो, न कि स्वयं विधि की अपेक्षा को लेकर हुई गलतफहमी से।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: धारा 76 उस किसी को भी क्षमा करती है जो कहे ‘मुझे पता नहीं था कि यह गैरकानूनी है।’
तथ्य: न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि धारा 76 केवल तथ्यगत भूल को कवर करती है, स्वयं कानून की अज्ञानता या गलतफहमी को नहीं; ‘मुझे कानून नहीं पता था’ मान्य बचाव नहीं है।
मिथक: कोई भी ईमानदार विश्वास, चाहे कितना भी लापरवाह हो, धारा 76 के तहत संरक्षित है।
तथ्य: न्यायालय अपेक्षा करते हैं कि विश्वास सद्भावना में और युक्तिसंगत दोनों हो — लापरवाह या अविवेकपूर्ण विश्वास संरक्षण के योग्य नहीं होता।