Skip to content
सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 56

repealed

Sentence of Europeans and Americans to penal servitude.

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

1860 की मूल भारतीय दंड संहिता, जो ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के तहत तैयार हुई थी, में यूरोपीय और अमेरिकी अपराधियों के लिए विशेष नियम थे, जिनके चलते उन्हें प्रायः भारतीयों की तुलना में अलग या हल्की सजाएँ मिलती थीं—जैसे अलग संस्थानों में भेजना या भिन्न प्रकार की सजाएँ देना। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद ऐसे नस्ल-आधारित भेदभावपूर्ण प्रावधान संविधान के विधि के समक्ष समानता के वचन से असंगत माने गए। इसी उद्देश्य से Criminal Law (Removal of Racial Discriminations) Act, 1949 बनाया गया, जिसने दंड संहिता तथा अन्य आपराधिक क़ानूनों से औपनिवेशिक काल की इन नस्लीय विभेदक धाराओं को हटाकर, नस्ल या राष्ट्रीयता की परवाह किए बिना सभी व्यक्तियों के साथ एक समान व्यवहार सुनिश्चित किया।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: धारा 56 आज भी मौजूद है और भारतीय न्यायालयों में विदेशियों को विशेष रियायत देती है।

    तथ्य: धारा 56 को 1949 में पूरी तरह निरस्त कर दिया गया, और आज भारतीय आपराधिक कानून में ऐसा कोई नस्ल-आधारित भेद नहीं है; राष्ट्रीयता या नस्ल की परवाह किए बिना भारतीय दंड संहिता के तहत सभी व्यक्तियों के साथ समान व्यवहार होता है।