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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 505

repealed

Statements conducing public mischief

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

धारा 505 समग्र रूप से ऐसे कथनों, अफवाहों या प्रतिवेदनों से संबंधित है जो जन-भय उत्पन्न कर सकते हैं, लोगों को राज्य या लोक-शांति (public tranquillity) के विरुद्ध अपराध करने को उकसा सकते हैं, या समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ा सकते हैं। यह उग्र स्वरूप वाला भाग विशेष रूप से उपासना-स्थल के भीतर या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान ऐसे अपराध किए जाने को अधिक कठोर दंड योग्य ठहराता है, यह मानते हुए कि पवित्र/सामुदायिक धार्मिक स्थल का दुरुपयोग कर शरारत फैलाना साम्प्रदायिक तनाव और अव्यवस्था का जोखिम बढ़ा देता है। (यह प्रविष्टि इस प्रावधान के उपलब्ध विशिष्ट पाठ को दर्शाती है; धारा 505 की वे आसपास की उपधाराएँ जो आधारभूत कथनों से संबंधित हैं, यहाँ प्रदर्शित नहीं हैं।)

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा केवल उन कथनों से संबंधित है जो धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं।

    तथ्य: यह प्रावधान स्थान-परिस्थिति पर केंद्रित है—उपासना-स्थल या धार्मिक अनुष्ठान—जहाँ कुछ लोक-शरारत संबंधी कथन-अपराध किए जाते हैं; यह स्वयं कथन की धार्मिक सामग्री पर विशेष रूप से नहीं है।