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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 50

repealed

Section

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय दंड संहिता, जिसका मसौदा 1860 के दशक में Thomas Babington Macaulay की विधि आयोग (Law Commission) के मार्गदर्शन में बना, अपने नियमों को अध्यायों में व्यवस्थित करती है (जैसे ‘मानव शरीर के विरुद्ध अपराध’ जैसे व्यापक शीर्षक), और प्रत्येक अध्याय को आगे क्रमांकित धाराओं में बाँटती है (विशिष्ट नियम)। संहिता के अन्य स्थानों पर ‘धारा’ शब्द का तकनीकी अर्थ क्या है, इस पर कोई भ्रम न रहे, इसलिए मसौदा-निर्माताओं ने यह संक्षिप्त परिभाषात्मक उपधारा जोड़ी। यह एक व्यवस्थात्मक (हाउसकीपिंग) प्रावधान है जिसका उद्देश्य केवल पाठ को साफ़-सुथरा पढ़ने और परस्पर-संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंस) में मदद करना है; यह कोई वास्तविक (सुब्स्टैंटिव) अधिकार या अपराध निर्मित नहीं करता।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: IPC में ‘धारा’ और ‘अध्याय’ एक ही अर्थ रखते हैं।

    तथ्य: ये अलग-अलग हैं: अध्याय व्यापक विषय-समूह होता है, जबकि धारा उसी अध्याय के भीतर की एक विशिष्ट क्रमांकित नियम-प्रविष्टि होती है — जैसा कि यह प्रावधान स्पष्ट करता है।