Indian Penal Code, 1860
धारा 496
repealedMarriage ceremony fraudulently gone through without lawful marriage
Whoever, dishonestly or with a fraudulent intention, goes through the ceremony of being married, knowing that he is not thereby lawfully married, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, and shall also be liable to fine.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह प्रावधान छल के उद्देश्य से किए गए बनावटी विवाह अनुष्ठानों पर केंद्रित है—जैसे अधूरे संस्कारों से या झूठे बहानों पर किया गया नकली अनुष्ठान—जहाँ अनुष्ठान में सम्मिलित व्यक्ति शुरू से जानता है कि वैध विवाह नहीं बनेगा। इसका उद्देश्य व्यक्तियों को इस छल से बचाना है कि वे अपने को विवाहित समझ बैठें जबकि वे नहीं हैं, प्रायः साथ‑निवास, संपत्ति या अन्य लाभ कपटपूर्वक प्राप्त करने के लिए।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि कोई भी विवाह जो बाद में अवैध सिद्ध हो जाए, स्वतः इस धारा के तहत दंडनीय है।
तथ्य: इस धारा के लिए आवश्यक है कि अनुष्ठान के समय ही बेईमानी या कपटपूर्ण आशय तथा यह जानकारी मौजूद हो कि उससे वैध विवाह नहीं बनेगा; यदि किसी को ईमानदारी से लगता था कि विवाह वैध है, पर बाद में उसमें त्रुटि निकल आई, तो वह इस दायरे में नहीं आता।