Skip to content
सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 496

repealed

Marriage ceremony fraudulently gone through without lawful marriage

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान छल के उद्देश्य से किए गए बनावटी विवाह अनुष्ठानों पर केंद्रित है—जैसे अधूरे संस्कारों से या झूठे बहानों पर किया गया नकली अनुष्ठान—जहाँ अनुष्ठान में सम्मिलित व्यक्ति शुरू से जानता है कि वैध विवाह नहीं बनेगा। इसका उद्देश्य व्यक्तियों को इस छल से बचाना है कि वे अपने को विवाहित समझ बैठें जबकि वे नहीं हैं, प्रायः साथ‑निवास, संपत्ति या अन्य लाभ कपटपूर्वक प्राप्त करने के लिए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि कोई भी विवाह जो बाद में अवैध सिद्ध हो जाए, स्वतः इस धारा के तहत दंडनीय है।

    तथ्य: इस धारा के लिए आवश्यक है कि अनुष्ठान के समय ही बेईमानी या कपटपूर्ण आशय तथा यह जानकारी मौजूद हो कि उससे वैध विवाह नहीं बनेगा; यदि किसी को ईमानदारी से लगता था कि विवाह वैध है, पर बाद में उसमें त्रुटि निकल आई, तो वह इस दायरे में नहीं आता।