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सं Samvidhan

Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023

धारा 83

Marriage ceremony fraudulently gone through without lawful marriage

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान (पहले भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 496) जान-बूझकर की गई कपटपूर्ण चालबाज़ी को निशाना बनाता है, जब नकली या दिखावटी विवाह-संस्कार किए जाएँ — जैसे कोई पहले से विवाहित व्यक्ति, या जिसे विवाह की कानूनी क्षमता ही न हो, फिर भी यह जानते हुए किसी अन्य के साथ विवाह-रीतियाँ पूरी करे कि उससे वैध विवाह नहीं बनेगा। इसका उद्देश्य लोगों को इस धोखे से बचाना है कि वे अपने को विवाहित समझ बैठें जबकि वे नहीं हैं, क्योंकि इससे उनकी गरिमा, संपत्ति-अधिकार, उत्तराधिकार और सामाजिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। कानून मानता है कि केवल बाहरी रूप से विवाह जैसा करना, जबकि उसकी कानूनी वैधता न हो, औपचारिक ‘विवाह’ टूटे बिना भी गंभीर हानि पहुँचा सकता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

पहले की IPC धारा के अंतर्गत न्यायालयों ने कहा कि अपराध सिद्ध करने के लिए दो बातों का एक साथ प्रमाण होना चाहिए: (1) किसी मान्य विवाह-संस्कार का वास्तविक संपादन, और (2) अभियुक्त को यह ज्ञान होना कि उस संस्कार से वैध विवाह नहीं बनता, तथा उसके साथ बेईमान या कपटपूर्ण आशय। केवल तकनीकी खामी से विवाह का अवैध निकल आना, बिना बेईमान इरादे के, पर्याप्त नहीं है। न्यायालय यह भी परखते हैं कि लागू निजी विधि या प्रथा के अनुसार वैध विवाह के अनिवार्य संस्कार वास्तव में हुए थे या नहीं, क्योंकि यदि कोई संस्कार हुआ ही नहीं, या अधूरा रहा, तो मामला इस प्रावधान के दायरे से बाहर जा सकता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा हर उस विवाह को दंडित करती है जो बाद में अवैध निकल आता है।

    तथ्य: न्यायालय इस बात का प्रमाण चाहते हैं कि उस व्यक्ति को पता था कि विवाह वैध नहीं होगा और उसने बेईमानी या ठगी के इरादे से कार्य किया — कानूनी वैधता के बारे में ईमानदार भूल इस दायरे में नहीं आती।

  • मिथक: यह प्रावधान केवल पुरुषों पर लागू होता है, क्योंकि पाठ में ‘वह (he)’ शब्द आया है।

    तथ्य: वैधानिक व्याख्या के सामान्य सिद्धांतों के तहत, ऐसे लिंग-निर्दिष्ट शब्दों को सामान्यतः तब तक सभी व्यक्तियों को सम्मिलित मानकर पढ़ा जाता है, जब तक कानून अलग से न कहे; आपराधिक प्रावधानों की व्याख्या में न्यायालय इस सामान्य नियम (simplified) का सहारा लेते हैं।