Indian Penal Code, 1860
धारा 433
repealedMischief by destroying, moving or rendering less useful a light-house or sea-mark
Whoever commits mischief by destroying or moving any light-house or other light used as a sea-mark, or any sea-mark or buoy or other thing placed as a guide for navigators, or by any act which renders any such light-house, sea-mark, buoy or other such thing as aforesaid less useful as a guide for navigators, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to seven years, or with fine, or with both.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
प्रकाशस्तंभ, समुद्री संकेत और बुआ नौवहन के अनिवार्य सहायक होते हैं, जो जहाज़ों को खतरनाक जलक्षेत्र, चट्टानों या उथली जगहों से बचाते हैं; इन्हें क्षति पहुँचाने से नाविकों व यात्रियों के प्राणों तथा मूल्यवान माल पर खतरा आ सकता है। यही कारण है कि इस धारा में शरारती कृत्यों में अपेक्षाकृत कठोर दंड का प्रावधान है, क्योंकि समुद्री सुरक्षा अवसंरचना में हस्तक्षेप से जहाज़-अपघात और जनहानि हो सकती है। भारतीय दंड संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita), 2023 के अंतर्गत यह धारा 326 से संबंधित है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतें इस पर ध्यान देती हैं कि अभियुक्त का कृत्य नौसंचालकों के मार्गदर्शन हेतु प्रयुक्त प्रकाशस्तंभ, समुद्री संकेत या बुआ को नष्ट करने, हिलाने, या कम उपयोगी बना देने वाला था या नहीं; और यह मानती हैं कि ऐसे हस्तक्षेप से समुद्री सुरक्षा पर गंभीर जोखिम उत्पन्न होता है, जो अन्य शरारती कृत्यों की तुलना में अधिकतम दंड को उचित ठहराता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि यह धारा केवल प्रकाशस्तंभों पर लागू होती है और बुआ जैसे छोटे संकेतों पर नहीं।
तथ्य: यह धारा न केवल प्रकाशस्तंभों, बल्कि किसी भी समुद्री संकेत, बुआ या नौसंचालकों के मार्गदर्शन के लिए लगाए गए अन्य साधनों को भी समाहित करती है; यह सिर्फ प्रकाशस्तंभों तक सीमित नहीं है।