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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 432

repealed

Mischief by causing inundation or obstruction to public drainage attended with damage

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सार्वजनिक जलनिकासी तंत्र समुदायों को बाढ़ और जलभराव से बचाता है, और उसमें जानबूझकर या जानते-बूझते हस्तक्षेप करने से घरों, सड़कों और जनस्वास्थ्य को व्यापक हानि हो सकती है। यह धारा साधारण शरारत की तुलना में कड़ा दंड इसलिए देती है क्योंकि ऐसा हस्तक्षेप केवल निजी संपत्ति नहीं, बल्कि सार्वजनिक अवसंरचना और सामूहिक सुरक्षा के लिए ख़तरा बनता है। भारतीय दंड संहिता के स्थान पर लागू Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में इसका समकक्ष धारा 326 है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें यह प्रमाण मांगती हैं कि किए गए कृत्य से वास्तव में बाढ़ (अधिक जलभराव) या सार्वजनिक जलनिकासी में अवरोध हुआ, या करने वाले को यह ज्ञात था कि ऐसा होने की संभावना है, और उससे वास्तविक चोट या क्षति हुई; इसी आधार पर इसे केवल निजी संपत्ति को प्रभावित करने वाली सामान्य शरारत से अलग किया जाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा केवल बड़े सरकारी जलनिकासी अवसंरचना परियोजनाओं पर ही लागू होती है — यह कथन गलत है।

    तथ्य: यह किसी भी सार्वजनिक जलनिकासी प्रणाली पर व्यापक रूप से लागू होती है, जिनमें मोहल्लों के स्थानीय वर्षा-जल नाले भी शामिल हैं, बशर्ते अवरोध या बाढ़ से वास्तविक चोट या क्षति हुई हो।