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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 434

repealed

Mischief by destroying or moving, etc., a land-mark fixed by public authority

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सार्वजनिक प्राधिकार द्वारा लगाए गए भूमि-चिह्न प्रायः भूमित्व की सीमाएँ, सर्वेक्षण के उद्देश्य, या प्रशासनिक विभाजन तय करते हैं; इनमें छेड़छाड़ से भ्रम, सीमा-विवाद, या प्रशासनिक क्षति हो सकती है। यह धारा अन्य शरारत-संबंधी प्रावधानों की तुलना में अपेक्षाकृत हलकी सज़ा देती है, क्योंकि यहाँ हानि का स्वरूप अधिक स्थानीय व प्रशासनिक है, न कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा (जैसे सड़कों या प्रकाशस्तंभों को नुकसान) जैसा। भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) के तहत यह धारा Section 326 के अनुरूप है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें यह प्रमाण मांगती हैं कि संबंधित भूमि-चिह्न किसी लोक सेवक के अधिकार से स्थापित किया गया था, और अभियुक्त ने उसे नष्ट किया, हटाया, या अन्य प्रकार से कम उपयोगी बना दिया; इससे उन निजी सीमा-चिन्हों का भेद स्पष्ट होता है जो किसी सार्वजनिक प्राधिकार द्वारा स्थापित नहीं हैं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा किसी भी सीमा-चिह्न पर लागू होती है, जिनमें पड़ोसियों द्वारा निजी तौर पर लगाए गए चिन्ह भी शामिल हैं।

    तथ्य: यह धारा विशेष रूप से उन भूमि-चिह्नों पर लागू होती है जिन्हें किसी लोक सेवक के अधिकार से स्थापित किया गया हो; यह ऐसे चिन्हों पर लागू नहीं होती जो व्यक्तियों ने बिना किसी आधिकारिक समर्थन के निजी रूप से लगाए हों।