Indian Penal Code, 1860
धारा 376B
repealedSexual intercourse by husband upon his wife during separation
Whoever has sexual intercourse with his own wife, who is living separately, whether under a decree of separation or otherwise, without her consent, shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than two years but which may extend to seven years, and shall also be liable to fine1.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारा, जो 2013 में जोड़ी गई, धारा 375 में वैवाहिक बलात्कार (marital rape) के सामान्य अपवाद से एक संकीर्ण अपवाद निर्मित करती है; यह मान्यता देती है कि जब पति-पत्नी अलग रहने लगते हैं, तो पत्नी को यौन संबंध से इंकार करने का अधिकार बना रहता है, और ऐसे पृथक्करण की स्थिति में जबरन संबंध बनाना एक पृथक दंडनीय अन्याय है—यद्यपि इसे धारा 376 के अंतर्गत बलात्कार की तुलना में कम कठोरता से दंडित किया जाता है और इसे औपचारिक रूप से ‘बलात्कार’ नहीं कहा गया है। यह पति-पत्नी के यौन स्वायत्तता (spousal sexual autonomy) की पहचान की दिशा में क्रमिक कानूनी प्रगति को दर्शाता है, जबकि सहवास के दौरान वैवाहिक बलात्कार का पूर्ण आपराधिकरण भारत में अब भी निरंतर बहस और वाद-विवाद का विषय है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में वैवाहिक पृथक्करण के दौरान असहमति पर आधारित संभोग से संबंधित एक तुलनीय व्यवस्था बनी रहती है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
न्यायालयों ने इसे धारा 376 के अंतर्गत बलात्कार की तुलना में एक पृथक और कम गम्भीर अपराध माना है, जो विशेषतः उस परिस्थिति में लागू होता है जब पति-पत्नी अलग रह रहे हों—चाहे न्यायिक आदेश से औपचारिक रूप से या व्यवहारतः—और ध्यान पत्नी की उस पृथक अवधि में असहमति पर केन्द्रित रहता है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह कहना गलत है कि भारतीय कानून के तहत पति को पत्नी पर जबरन यौन संबंध बनाने के लिए कभी दंडित नहीं किया जा सकता।
तथ्य: यद्यपि सहवास के दौरान साधारण वैवाहिक बलात्कार धारा 375 के अंतर्गत बलात्कार की परिभाषा से अब भी बाहर है, फिर भी यह पृथक धारा विशेष रूप से तब असहमति पर आधारित संभोग को अपराध ठहराती है जब पति-पत्नी अलग रह रहे हों।