Indian Penal Code, 1860
धारा 376AB
repealedPunishment for rape on woman under twelve years of age
Whoever, commits rape on a woman under twelve years of age shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than twenty years, but which may extend to imprisonment for life, which shall mean imprisonment for the remainder of that person’s natural life, and with fine or with death:1 Provided that such fine shall be just and reasonable to meet the medical expenses and rehabilitation of the victim: Provided further that any fine imposed under this section shall be paid to the victim.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारा Criminal Law (Amendment) Act, 2018 के माध्यम से जोड़ी गई थी, जो बहुत छोटे बच्चों के साथ हुए भयावह बलात्कारों, जिनमें Kathua प्रकरण भी शामिल था, पर देशव्यापी आक्रोश के बाद लाई गई। इसका उद्देश्य इस विशिष्ट श्रेणी के बाल-बलात्कार के लिए मृत्युदंड की अनुमति देकर कड़ा प्रतिरोधक संदेश देना था। यह नीति-विकल्प दर्शाता है कि अत्यंत कम आयु के पीड़ितों के विरुद्ध यौन हिंसा पर सबसे कठोर दंड लगाए जाएँ। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 बारह वर्ष से कम आयु के बच्चे के बलात्कार के लिए तुलनीय प्रावधान बनाए रखती है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
उच्चतम न्यायालय सहित न्यायालयों ने इस धारा में निहित मृत्युदंड के प्रावधान की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा है, साथ ही यह सावधानी भी बताई है कि मृत्युदंड ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ मामलों तक ही सीमित रहना चाहिए; इस श्रेणी के भीतर भी स्वतः मृत्यु-दंड देने के बजाय प्रत्येक मामले में व्यक्तिगत परिस्थितियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर सजा तय की जानी चाहिए।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: इस धारा के तहत प्रत्येक दोषसिद्धि स्वतः मृत्युदंड में परिणत होती है।
तथ्य: न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि मृत्युदंड एक विकल्प भर है, अनिवार्य परिणाम नहीं, और उसे ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ मामलों के लिए ही, समुचित न्यायिक विचार-विमर्श के बाद, आरक्षित रखा जाना चाहिए।