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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 368

repealed

Wrongfully concealing or keeping in confinement, kidnapped or abducted person

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह अनुभाग उस कमी को दूर करता है जो केवल अपहरण करने वाले को दंडित करने तक सीमित थी: यह स्पष्ट करता है कि अपहृत व्यक्ति को छिपाने या उसकी बंदी अवस्था को जारी रखने में मदद करना, मूल अपहरण जितना ही गंभीर अपराध है, क्योंकि ऐसा छिपाव पीड़ित की पीड़ा बढ़ाता है और मूल अपराधी को न्याय से बचने में सहायता देता है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में भी अपहृत या अगवा किए गए व्यक्ति को छिपाने के लिए समान दंड का प्रावधान बना हुआ है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें इस बात की जांच करती हैं कि छिपाने वाले को यह ज्ञान था कि व्यक्ति का अपहरण या अगवा हुआ है, और छिपाने के पीछे जो उद्देश्य या नीयत रही, उसके अनुरूप दंड निर्धारित करती हैं, जिससे व्यावहारिक रूप से छिपाने वाले को उसी उद्देश्य के लिए मूल अपहरणकर्ता जितना ही दोषी माना जाता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: केवल वही व्यक्ति दंडित किया जा सकता है जो शारीरिक रूप से किसी को उठा कर ले जाए—यह कथन गलत है।

    तथ्य: जो कोई भी बाद में यह जानते हुए अपहृत पीड़ित को छिपाने या बंदी रखने में मदद करता है, उसे मूल अपहरण या अगवा जैसा ही दंड मिलता है, मानो वही अपराध उसने किया हो।