Indian Penal Code, 1860
धारा 364A
repealedKidnapping for ransom, etc.
Whoever kidnaps or abducts any person or keeps a person in detention after such kidnapping or abduction, and threatens to cause death or hurt to such person, or by his conduct gives rise to a reasonable apprehension that such person may be put to death or hurt, or causes hurt or death to such person in order to compel the Government or any foreign State or international inter-governmental organisation or any other person to do or abstain from doing any act or to pay a ransom, shall be punishable with death or imprisonment for life, and shall also be liable to fine.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारा खास तौर पर फिरौती हेतु अपहरण और आतंक-संबंधित अभिभवन से निपटने के लिए जोड़ी गई थी, क्योंकि ये सामान्य अपहरण से अधिक खतरनाक होते हैं—इनमें बंधक के प्राणों पर खतरे के जरिए किसी तृतीय पक्ष, कभी-कभी स्वयं राज्य, को बाध्य किया जाता है। यह संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े फिरौती-अपहरण को कानून द्वारा अत्यंत गंभीरता से लेने का प्रतिबिंब है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में भी फिरौती के लिए अपहरण को समान रूप से कड़े दंड के साथ अपराध माना गया है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह धारा केवल आतंकवाद-सम्बद्ध माँगों तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी फिरौती-सम्बंधी माँग पर व्यापक रूप से लागू होती है; हानि की धमकी या भय की स्थिति वास्तविक रूप से लागू होना आवश्यक नहीं—विश्वसनीय धमकी पर्याप्त है, बशर्ते उद्देश्य भुगतान या अनुपालन को बाध्य करना हो।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यह धारा केवल आतंकवाद से जुड़े अपहरणों पर ही लागू होती है—यह कथन गलत है।
तथ्य: अदालतों ने स्पष्ट किया है कि यह धारा किसी भी फिरौती या दबावकारी माँग के लिए किए गए अपहरण पर लागू होती है—चाहे वे सामान्य अपराधियों, गिरोहों या व्यक्तियों द्वारा किए गए हों—सिर्फ आतंकवाद-सम्बद्ध मामलों तक सीमित नहीं।