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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 360

repealed

Kidnapping from India

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान किसी व्यक्ति के भारतीय विधि के अधिकार क्षेत्र और उसकी समुदाय के भीतर बने रहने के अधिकार की रक्षा करता है, तथा लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध विदेश ले जाए जाने से रोकता है, जहाँ भारतीय प्राधिकारियों की सहायता करने की शक्ति कम हो सकती है। यह औपनिवेशिक दौर की उन चिंताओं को दर्शाता है जब लोगों को उनकी सहमति के बिना अन्य क्षेत्रों में ले जाया जाता था। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 (भारतीय दंड संहिता का नवीन रूप) ने भारत से अपहरण संबंधी समान प्रावधान बनाए रखा है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

अदालतें इस बात पर ध्यान देती हैं कि सहमति वास्तव में उस व्यक्ति या उसके विधिक प्रतिनिधि द्वारा दी गई थी या नहीं; छल से प्राप्त सहमति, या ऐसे व्यक्ति द्वारा दी गई सहमति जिसे सहमति देने का अधिकार ही नहीं है, वैध सहमति नहीं मानी जाती।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यदि किसी व्यक्ति ने किसी यात्रा दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर दिए हों, तो उसने अपने आप सहमति दे दी मानी जाएगी और यह भारत से अपहरण नहीं हो सकता—यह कथन गलत है।

    तथ्य: कपट, छल या वास्तविक स्थिति की उचित समझ के बिना प्राप्त की गई सहमति, कानून के अंतर्गत वैध सहमति नहीं मानी जाती।