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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 335

repealed

Voluntarily causing grievous hurt on provocation

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा 334 का गम्भीर-चोट वाला समकक्ष है। यह मानता है कि उकसावे की अचानक तीव्र अवस्था में की गई गम्भीर चोट, सोच‑समझकर की गई गम्भीर मारपीट की तुलना में कम दोषयोग्य है, फिर भी यह स्वीकार करता है कि गम्भीर चोट के लिए केवल नाममात्र सज़ा पर्याप्त नहीं है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: गंभीर उकसावे का मतलब यह नहीं है कि कोई सज़ा ही नहीं होगी।

    तथ्य: यहाँ दंड घटाया जाता है, हटाया नहीं जाता; गम्भीर उकसावे की स्थिति में भी गम्भीर चोट पहुँचाना अपराध ही रहता है।