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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 325

repealed

Punishment for voluntarily causing grievous hurt

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा घोर चोट पहुँचाने के लिए मूल दंड निर्धारित करती है—ऐसी गंभीर चोट जिसका परिभाषित स्वरूप धारा 320 में दिया गया है—बशर्ते खतरनाक अस्त्र-शस्त्र या उपायों का प्रयोग न हुआ हो; क्योंकि ऐसे खतरनाक साधनों का प्रयोग होने पर कठोर धारा 326 लागू होती है। यह एक श्रेणीबद्ध व्यवस्था को दर्शाती है, जिसमें चोट की गंभीरता और प्रयुक्त तरीके—दोनों—दंड निर्धारण को प्रभावित करते हैं। भारतीय दंड संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023) में अब यह अपराध धारा 117(2) के अंतर्गत आता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: सभी गंभीर चोटों को एक समान दंड नहीं मिलता; दंड इस पर भी निर्भर करता है कि चोट किन साधनों से पहुँचाई गई—खतरनाक उपायों से होने पर कठोर धारा 326 लागू होती है।

    तथ्य: यह धारा उन घोर चोटों को कवर करती है जो खतरनाक हथियारों या उपायों के बिना पहुँचाई गई हों; ऐसे हथियार/उपायों का प्रयोग होने पर कठोर दंड वाली धारा 326 लागू होती है।