Indian Penal Code, 1860
धारा 326A
repealedVoluntarily causing grievous hurt by use of acid, etc.
Whoever causes permanent or partial damage or deformity to, or bums or maims or disfigures or disables, any part or parts of the body of a person or causes grievous hurt by throwing acid1 on or by administering acid to that person, or by using any other means with the intention of causing or with the knowledge that he is likely to cause such injury or hurt, shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than ten years but which may extend to imprisonment for life, and with fine;
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारा दंड विधि (संशोधन) अधिनियम, 2013 द्वारा जोड़ी गई थी, जब अम्ल-हमलों—विशेषकर महिलाओं के विरुद्ध—को लेकर व्यापक जन-आक्रोश हुआ, क्योंकि ये हमले अत्यंत गंभीर, स्थायी और प्रायः विकृत करने वाली चोटें पहुँचाते थे और पहले केवल सामान्य गंभीर चोट के प्रावधानों के तहत दंडित होते थे। इस संशोधन ने एक पृथक और कठोर अपराध निर्मित किया, जिसमें अनिवार्य न्यूनतम सजा रखी गई, ताकि अम्ल-हमलों से होने वाली भयावह और स्थायी क्षति का समुचित परिलक्षण हो, और पीड़ितों को चिकित्सकीय उपचार के लिए क्षतिपूर्ति सुनिश्चित हो सके। भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत यह अपराध अब धारा 124 में समाहित है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
न्यायालयों, जिनमें सर्वोच्च न्यायालय भी शामिल है, ने अम्ल-हमला मामलों में दंड के साथ-साथ पीड़ित क्षतिपूर्ति पर विशेष बल दिया है; राज्य सरकारों को निर्देश दिया गया है कि वे पीड़ितों को निःशुल्क चिकित्सकीय उपचार और वित्तीय क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराएँ, और ऐसे हमलों की रोकथाम के लिए अम्ल की बिक्री को भी विनियमित किया गया है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: अम्ल-हमला मामलों को सामान्य चोट के सामान्य गंभीर चोट वाले प्रावधानों के अंतर्गत ठीक उसी तरह से निपटाया जाता है।
तथ्य: 2013 से, अम्ल-हमलों के लिए एक पृथक धारा है जिसमें अनिवार्य न्यूनतम दस वर्ष की सजा का प्रावधान है, जो ऐसे हमलों से होने वाली विशिष्ट रूप से गंभीर और स्थायी क्षति को परिलक्षित करता है।