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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 311

repealed

Punishment

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह अनुच्छेद धारा 310 में परिभाषित ‘ठग’ होने के अपराध के लिए दंड निर्धारित करता था। यह उन्नीसवीं सदी में समूचे भारत में यात्रियों की हत्या व लूट करने वाले संगठित गिरोहों को समाप्त करने के औपनिवेशिक कानूनी अभियान का हिस्सा था। धारा 310 की तरह ही, यह प्रावधान भी आज की अदालतों में शायद ही कभी प्रयुक्त होता है, क्योंकि उस विशिष्ट रूप के संगठित हत्यारे गिरोह अब अस्तित्व में नहीं हैं; आधुनिक कानून इसके स्थान पर हत्या, आपराधिक षड्यंत्र और संगठित अपराध से संबंधित धाराओं का उपयोग करता है। यह अनुच्छेद भारत के वर्तमान दंड संहिता ‘Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023’ से हटा दिया गया है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है; यह अनुच्छेद आधुनिक हिंसक अपराधियों कहलाने वाले ‘ठगों’ पर लागू होकर सक्रिय रूप से उपयोग में नहीं है।

    तथ्य: यह प्रावधान केवल धारा 310 में परिभाषित विशिष्ट ऐतिहासिक ‘ठग’ गिरोहों पर लागू होता था और भारत की वर्तमान दंड संहिता से इसे हटा दिया गया है।