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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 310

repealed

Thug

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा उन्नीसवीं सदी के भारत के ऐतिहासिक ठगgee गिरोहों को निशाना बनाती थी—संगठित समूह जो लंबी सड़क यात्राओं पर मुसाफिरों की हत्या और लूट करते थे, प्रायः विधिवत गला घोंटने के जरिए। ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन ने 1830–1840 के दशक में इन जालों को दबाने के लिए विशेष कानून बनाए, और उसी अभियान के अवशेष के रूप में यह परिभाषा 1860 के Indian Penal Code में शामिल कर दी गई। आज इसके लगभग कोई आधुनिक उपयोग नहीं हैं, क्योंकि इस तरह के संगठित राजमार्ग‑आधारित हत्यारे गिरोह अब ऐतिहासिक रूप में मौजूद नहीं हैं। यह धारा, धारा 311 के साथ, Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में निरस्त कर दी गई है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: इस धारा में ‘ठग’ शब्द का अर्थ रोज़मर्रा की अंग्रेज़ी के ‘ठग’ (thug) जैसा, यानी कोई भी हिंसक अपराधी, बताया गया है।

    तथ्य: इस धारा में ‘ठग’ का अर्थ बहुत विशिष्ट ऐतिहासिक संदर्भ में है—उन्नीसवीं सदी के वे संगठित गिरोह जो एक साथ लूट और हत्या करते थे; यह किसी भी सामान्य हिंसक व्यक्ति के लिए नहीं है।