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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 309

repealed

Attempt to commit suicide

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह औपनिवेशिक युग का उपबंध आत्महत्या के प्रयास को ही अपराध ठहराता था। दशकों तक मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और न्यायालयों ने इसकी तीखी आलोचना की कि यह गहरे संकट में फंसे लोगों को मदद देने के बजाय दंडित करता है और आत्महत्या से बचे लोगों को फिर से आघात पहुँचाता है। Mental Healthcare Act, 2017 ने इस धारा के व्यावहारिक प्रभाव को बदल दिया—यह मानकर कि जो भी व्यक्ति आत्महत्या का प्रयास करता है वह गंभीर तनाव में होता है और जब तक विपरीत सिद्ध न हो, उसके विरुद्ध इस धारा के तहत न तो मुकदमा चलेगा और न दंड दिया जाएगा—जिससे व्यवहार में आत्महत्या के प्रयास का अपराधीकरण प्रभावी रूप से समाप्त हो गया। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 ने इस अपराध को पूरी तरह हटा दिया है, जो आत्महत्या के प्रयासों को अपराध नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा मानने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में माना कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत मिलने वाला जीवन का अधिकार मरने के अधिकार को शामिल नहीं करता; किंतु बाद की पीठों और विधायिका ने आत्महत्या के प्रयास के अपराधीकरण को हटाने की दिशा में कदम बढ़ाए। विभिन्न उच्च न्यायालयों और विधि आयोग ने निरसन की सिफारिश की, जिसका परिणाम Mental Healthcare Act, 2017 में दिखा, जिसने अधिकांश परिस्थितियों में इस धारा के तहत मुकदमे से आत्महत्या से बचे लोगों को सुरक्षा प्रदान की।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: आज भी लोगों को इस कानून के तहत नियमित रूप से जेल भेजा जाता है—यह कथन गलत है।

    तथ्य: 2017 से, Mental Healthcare Act ऐसे व्यक्तियों को गंभीर तनावग्रस्त मानता है और सामान्यतः उन्हें अभियोजन से बचाव देता है; और नए दंड संहिता ने इस अपराध को पूरी तरह हटा दिया है।