Indian Penal Code, 1860
धारा 306
repealedAbetment of suicide
If any person commits suicide, whoever abets the commission of such suicide, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to ten years, and shall also be liable to fine.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह धारा आत्महत्या के उकसावे को दंडित करती है ताकि उन लोगों को उत्तरदायी ठहराया जा सके जिनके शब्दों या कृत्यों—जैसे लगातार उत्पीड़न, क्रूरता, या सक्रिय सहायता—से कोई व्यक्ति अपनी जान ले लेता है। इसका उपयोग अक्सर दहेज उत्पीड़न, कार्यस्थल पर बदसलूकी, या अपमानजनक संबंधों के मामलों में होता है, जहाँ पीड़ित की आत्महत्या सीधे किसी अन्य के आचरण से जुड़ी होती है। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 के तहत अब यह Section 108 में सम्मिलित है।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतो ने बार‑बार माना है कि इस धारा के तहत दोषसिद्धि के लिए ‘उकसावा (abetment)’ का स्पष्ट प्रमाण आवश्यक है—जैसे सक्रिय भड़काना, साज़िश, या जानबूझकर सहायता—और मात्र उत्पीड़न या झगड़ा पर्याप्त नहीं है, जब तक कि वह सीधे और निकट कारण के रूप में व्यक्ति को आत्महत्या के लिए न धकेल दे। सर्वोच्च न्यायालय ने केवल इसलिए लोगों को दोषी ठहराने से सावधान किया है कि किसी विवाद के बाद आत्महत्या हो गई; उसने अभियुक्त के कृत्यों और आत्महत्या के बीच प्रत्यक्ष या लगभग प्रत्यक्ष कड़ी के प्रमाण पर ज़ोर दिया है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: आत्महत्या करने वाले व्यक्ति से जुड़े किसी भी व्यक्ति—जैसे जीवनसाथी या नियोक्ता—को केवल मतभेद होने भर से अपने‑आप इस धारा के तहत आरोपित किया जा सकता है।
तथ्य: अदालतें केवल पहले हुए झगड़े या रिश्ते के आधार पर नहीं, बल्कि आत्महत्या से सीधे जुड़े सक्रिय उद्दीपन या जानबूझकर प्रोत्साहन के स्पष्ट साक्ष्य की माँग करती हैं।