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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 305

repealed

Abetment of suicide of child or insane person

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

कानून बच्चों और उन लोगों—जो अपनी कार्रवाइयों को पूरी तरह समझ या नियंत्रित नहीं कर पाते—की आत्महत्या के लिए उकसाने (अभिवृत्ति/उत्तेजन) को अत्यंत गंभीर मानता है, क्योंकि ऐसे लोग दूसरों की मनोवैज्ञानिक छेड़छाड़, दबाव या शोषण का प्रतिरोध करने में कम सक्षम होते हैं। यह इस आकलन को दर्शाता है कि किसी असुरक्षित व्यक्ति को अपना जीवन समाप्त करने में मदद करना, प्रत्यक्ष रूप से उसकी मृत्यु का कारण बनने के क़रीब है। भारतीय दंड संहिता के स्थान पर आए Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 में इसका समकक्ष प्रावधान धारा 108 है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति को दंडित करती है।

    तथ्य: यह असुरक्षित पीड़ित को नहीं, बल्कि आत्महत्या के अभिवृत्ति (मदद या प्रोत्साहन) करने वाले व्यक्ति को दंडित करती है।