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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 268

repealed

Public nuisance

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह धारा भारतीय दंड संहिता के सार्वजनिक उपद्रव वाले अध्याय में प्रयुक्त कानूनी परिभाषा देती है; इसके बाद (अन्य धाराओं में) जल को गंदा करना, सार्वजनिक मार्गों में बाधा डालना, या जन-स्वास्थ्य व सुरक्षा को जोखिम में डालना जैसे कृत्यों के लिए विशिष्ट दंड निर्धारित हैं। इसकी जड़ें अंग्रेजी ‘कामन-लॉ (common law)’ की ‘न्यूज़ेंस (nuisance)’ सिद्धि में हैं, और इसका उद्देश्य समुदाय के साझा हितों—जैसे स्वच्छ वायु, सुरक्षित सड़कें और निर्बाध सार्वजनिक स्थान—को ऐसे नुकसानों से बचाना है जिन्हें कोई एक निजी वाद पर्याप्त रूप से नहीं सुलझा सकता क्योंकि वे किसी एक पहचाने जा सकने वाले पीड़ित की बजाय अनिश्चित संख्या में लोगों को प्रभावित करते हैं। Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 द्वारा प्रतिस्थापित, प्रभावी 1 July 2024।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: गलत: सार्वजनिक उपद्रव का मतलब सिर्फ तेज़ शोर या बदबू होता है।

    तथ्य: यह किसी भी ऐसे कृत्य या चूक को समेटता है जो जनता या किसी पड़ोस को साझा चोट, खतरा, अवरोध या खीझ पहुँचाए—जिसमें सड़क अवरुद्ध होना, असुरक्षित परिस्थितियाँ, या स्वास्थ्य-जोखिम शामिल हो सकते हैं; केवल शोर या गंध तक सीमित नहीं है।