Indian Penal Code, 1860
धारा 26
repealedReason to believe
A person is said to have “reason to believe” a thing, if he has sufficient cause to believe that thing but not otherwise.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
भारतीय दंड संहिता में कई अपराधों में (जैसे चोरी की संपत्ति प्राप्त करना या अपराधी की सहायता करना) ‘मानने का कारण’ वाक्यांश का उपयोग दोषसिद्धि के लिए आवश्यक मानसिक अवस्था (मेंस रिया [mens rea]) निर्धारित करने को किया गया है। प्रणेता, जिनका नेतृत्व लॉर्ड मैकाले कर रहे थे, ऐसी कसौटी चाहते थे जो मात्र शंका से सख्त हो, पर पूर्ण निश्चितता या वास्तविक ज्ञान की मांग न करे। धारा 26 इसी मध्य मानक को साफ़ तय करने के लिए जोड़ी गई, ताकि न्यायालयों और नागरिकों को स्पष्ट रहे कि ‘मानने का कारण’ पर आधारित दायित्व के लिए केवल अटकल नहीं, बल्कि वस्तुनिष्ठ रूप से पर्याप्त आधार चाहिए।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
भारतीय न्यायालय लगातार मानते आए हैं कि ‘मानने का कारण’ मात्र शंका से ऊँची, लेकिन वास्तविक ज्ञान या पूर्ण निश्चितता से निचली कसौटी है। न्यायालय यह परखते हैं कि आरोपी की स्थिति में एक समझदार और सावधान व्यक्ति, वही तथ्य उपलब्ध होने पर, ऐसा विश्वास बनाता या नहीं। चोरी की संपत्ति प्राप्त करने (धारा 411 IPC) जैसे मामलों में प्रायः धारा 26 का सहारा लेकर देखा जाता है कि आरोपी के पास संपत्ति के चोरी होने का विश्वास बनाने के लिए पर्याप्त तथ्यात्मक आधार था या नहीं—सिर्फ़ शंका या बाद की समझ पर नहीं।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: ‘मानने का कारण’ का अर्थ किसी तथ्य का वास्तविक ज्ञान होना ही है।
तथ्य: न्यायालय ‘मानने का कारण’ को वास्तविक ज्ञान से निचली कसौटी मानते हैं—इसमें निश्चितता नहीं, बल्कि विश्वास बनाने के लिए पर्याप्त वस्तुनिष्ठ आधार चाहिए।
मिथक: केवल शंका या संदेह ही ‘मानने का कारण’ कहलाने के लिए काफ़ी है।
तथ्य: यह धारा विशेष रूप से ‘पर्याप्त वजह’ की मांग करती है, अर्थात महज़ शंका, बिना ठोस सहायक तथ्यों के, कानूनी मानक को पूरा नहीं करती।