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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 22

repealed

Movable property

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय दंड संहिता, 1860 में चोरी, उगाही (एक्सटॉर्शन), और आपराधिक अपहरण-भोग जैसी अपराध धाराओं को सही तरह लागू करने के लिए ‘चल संपत्ति’ की स्पष्ट परिभाषा आवश्यक थी। क्योंकि भूमि-संबंधी विवाद संपत्ति और दीवानी कानूनों के तहत अलग से निपटाए जाते थे, विधि-निर्माताओं ने परिभाषा से भूमि और स्थायी रूप से जुड़े फिक्स्चर को बाहर रखा, ताकि आपराधिक कानून का ध्यान नकद, आभूषण, वाहन या माल जैसे ठोस, अंतरणीय वस्तुओं पर रहे।

न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं

भारतीय न्यायालयों ने सामान्यतः इस अनुभाग का शाब्दिक अर्थ अपनाया है: जो वस्तु पृथ्वी से जुड़ी हो (जैसे पेड़ या भवन-फिक्स्चर) यदि काटकर या अलग कर दी जाए—उदाहरण के लिए पेड़ से निकली लकड़ी या दीवार से निकाली गई ईंटें—तो वह चल संपत्ति बन जाती है और चोरी का विषय हो सकती है। इसलिए न्यायालयों ने कथित अपराध के समय संपत्ति की अवस्था पर ध्यान दिया है, न कि उसकी मूल अवस्था पर।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: पेड़, फ़सलें या इमारतें भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत कभी भी ‘चल संपत्ति’ नहीं होतीं।

    तथ्य: ऐसी वस्तुएँ जब काट दी जाएँ, अलग कर दी जाएँ, या भूमि से हटा दी जाएँ, तो वे चल संपत्ति बन जाती हैं और चोरी या समान अपराधों का विषय हो सकती हैं।

  • मिथक: यह अनुभाग भारत के सभी संपत्ति-क़ानूनों पर लागू होता है।

    तथ्य: यह परिभाषा विशेषतः भारतीय दंड संहिता और आपराधिक कानून के संदर्भ के लिए है; अन्य क़ानून, जैसे Transfer of Property Act, दीवानी प्रयोजनों के लिए ‘चल संपत्ति’ को अलग तरह से परिभाषित करते हैं।