Indian Penal Code, 1860
धारा 21
repealedPublic servant
The words “public servant” denote a person falling under any of the descriptions hereinafter following, namely:
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
भारतीय दंड संहिता में ‘लोक सेवक’ का स्पष्ट और एकसमान अर्थ आवश्यक था, क्योंकि कई अपराध (जैसे रिश्वतखोरी, सरकारी कर्तव्य की अवज्ञा, या लोक न्याय के विरुद्ध अपराध) इस पर निर्भर करते हैं कि संबंधित व्यक्ति ऐसा पद धारण करता था या नहीं। एक व्यापक परिभाषा देने के बजाय, मसौदा-निर्माताओं ने अस्पष्टता और इस बात पर मुकदमेबाज़ी से बचने हेतु विशिष्ट श्रेणियों (जैसे न्यायाधीश, सरकारी अधिकारी, निर्वाचन अधिकारी आदि) की सूची देने का मार्ग चुना।
न्यायालय इसे कैसे पढ़ते हैं
अदालतों ने सामान्यतः इस प्रारंभिक पंक्ति को इस संकेत के रूप में पढ़ा है कि ‘लोक सेवक’ की परिभाषा परिपूर्ण (एक्सहॉस्टिव) है, पर उसका उद्देश्यपूर्ण अर्थ लगाया जाना चाहिए—यानि किसी सामान्य शब्दकोशीय अर्थ के बजाय आगे दी गई विशिष्ट धाराओं को प्रभाव देना है। बाद की क्रमांकित धाराओं की व्याख्या करने वाले निर्णय (जैसे State of Gujarat v. Mansukhbhai Kanjibhai Shah या R.S. Nayak v. A.R. Antulay) इसी रूपरेखा पर निर्भर करते हैं ताकि यह तय किया जा सके कि कोई विशेष व्यक्ति, जैसे सरकारी कर्मचारी या निर्वाचित पदाधिकारी, सूचीबद्ध वर्णनों के अंतर्गत ‘लोक सेवक’ ठहरता है या नहीं।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: यही पंक्ति स्वयं बताती है कि कौन ‘लोक सेवक’ है।
तथ्य: यह स्वयं किसी को विशिष्ट रूप से परिभाषित नहीं करती — यह केवल उन श्रेणियों की सूची का परिचय देती है जो वास्तव में परिभाषा का काम करेंगी।