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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 195A

repealed

Threatening any person to give false evidence

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय दंड संहिता की धारा 195A वर्ष 2006 में साक्षी-सुरक्षा को सुदृढ़ करने हेतु जोड़ी गई थी। उच्च-प्रोफ़ाइल आपराधिक मुकदमों में धमकियों के कारण पीड़ितों और गवाहों के शत्रुतापूर्ण हो जाने की बढ़ती चिंता के बाद विधायकों ने माना कि गवाहों को धमकाना न्यायालयों की सत्य-पता लगाने की प्रक्रिया को कमजोर करता है और गंभीर न्यायिक चूक का कारण बन सकता है। इसलिए एक विशिष्ट अपराध बनाया गया, जिसमें झूठे बयान से उत्पन्न हानि के अनुरूप कड़ी परिणामी सज़ाएँ जोड़ी गईं।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: धमकी तभी अपराध मानी जाएगी जब गवाह वास्तव में अदालत में झूठ बोले।

    तथ्य: कानून झूठा साक्ष्य दिलवाने के इरादे से दी गई धमकी के कृत्य को ही दंडित करता है—चाहे गवाह बाद में वास्तव में झूठा साक्ष्य दे या न दे।

  • मिथक: यह धारा केवल स्वयं गवाह को दी गई धमकियों की ही रक्षा करती है।

    तथ्य: कानून उन व्यक्तियों को दी गई धमकियों को भी कवर करता है जिनकी परवाह गवाह करता है, जैसे परिवार के सदस्य।