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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 165A

repealed

Rep. by the Prevention of Corruption Act, 1988

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

धारा 165A मूलतः भारतीय दंड संहिता का भाग थी और लोक सेवकों को रिश्वत देने की उकसाहट या पेशकश के अपराध से संबंधित थी। जब संसद ने भ्रष्टाचार-निवारण के प्रावधानों को एक समर्पित विधि में समेकित और सशक्त करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 पारित किया, तब इस तरह के ओवरलैप करने वाले भा.दं.सं. प्रावधानों को, जैसे यह धारा, निरसित कर दिया गया ताकि भ्रष्टाचार से जुड़े सभी अपराध नए, अधिक व्यापक अधिनियम के अधीन आएँ।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कथन गलत है: भा.दं.सं. की धारा 165A का आज अभियोजन के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता।

    तथ्य: इसे 1988 में निरसित कर दिया गया था; अब रिश्वतखोरी के अपराधों का अभियोजन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत होता है।