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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 139

repealed

Persons subject to certain Acts

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

भारतीय दण्ड संहिता में एक विशेष अध्याय (अध्याय VII) है, जो सशस्त्र बलों के सदस्यों द्वारा किए गए विद्रोह, पलायन और ऐसे कृत्यों के उकसावे जैसे अपराधों से सम्बंधित है। परन्तु सशस्त्र बलों के पास पहले से अपने विस्तृत अनुशासनात्मक संहिता (Army Act, Navy Act, Air Force Act) हैं, जो सैन्य न्याय, कोर्ट मार्शल तथा कमान-अनुशासन के लिए बनी हैं। धारा 139 दोहरी क्षेत्राधिकार या टकराते दण्ड से बचाती है—यह स्पष्ट करके कि जो व्यक्ति पहले से इन विशिष्ट सैन्य क़ानूनों के अधीन है, उसे इन विशिष्ट अपराधों के लिए IPC के बजाय उन्हीं क़ानूनों के तहत मुक़दमे और दण्ड का सामना करना चाहिए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह धारा का अर्थ यह है कि सैनिकों को विद्रोह या पलायन जैसे अपराधों के लिए कभी दण्ड नहीं दिया जा सकता।

    तथ्य: सैनिकों को ऐसे अपराधों के लिए दण्ड मिलता है—पर उनके अपने विशिष्ट सैन्य क़ानून (जैसे Army Act, 1950) के तहत, न कि सामान्य भारतीय दण्ड संहिता के तहत।

  • मिथक: यह धारा सशस्त्र बलों के कर्मियों को IPC के सभी प्रावधानों से पूर्ण प्रतिरक्षा देती है।

    तथ्य: यह छूट केवल IPC के इसी विशेष अध्याय में परिभाषित अपराधों (सेना, नौसेना और वायुसेना से सम्बंधित अपराध) तक सीमित है, IPC के सभी अपराधों पर नहीं।