Indian Penal Code, 1860
धारा 140
repealedWearing garb or carrying token used by soldier, sailor or airman
Whoever, not being a soldier, sailor or airman in the Military, Naval or Air service of the Government of India, wears any garb or carries any token resembling any garb or token used by such a soldier, sailor or airman with the intention that it may be believed that he is such a soldier, sailor or airman, shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three months, or with fine which may extend to five hundred rupees, or with both.
सत्यापन प्रतीक्षित
यह क्यों है
यह उपबंध 1860 के मूल भारतीय दण्ड संहिता का हिस्सा था, जो औपनिवेशिक ब्रिटिश शासन के दौरान बनाई गई थी। सशस्त्र बलों की वर्दी और पदक/चिन्ह अधिकार और जन-विश्वास का प्रतीक होते हैं; इसलिए कानून का उद्देश्य बहुरूपियों द्वारा उस विश्वास का धोखे, कपट या शरारत के लिए दुरुपयोग रोकना था। यह सैन्य पहचान की अखंडता की रक्षा करता है और इस बारे में भ्रम से बचाता है कि वास्तव में सशस्त्र बलों में कौन सेवा कर रहा है।
आम गलतफहमियाँ
मिथक: नाटक, फ़िल्म या फैंसी-ड्रेस पार्टी के लिए सैन्य जैसी पोशाक पहनना इस धारा के तहत अवैध है।
तथ्य: कानून यह अपेक्षा करता है कि ‘यह विश्वास किए जाने का आशय’ हो कि आप सचमुच सैनिक हैं — इसलिए मनोरंजन हेतु पहनी गई या स्पष्ट रूप से गैर-छलपूर्ण पोशाक इस आशय की शर्त पूरी नहीं करती।
मिथक: केवल पूरी वर्दी पहनना ही मायने रखता है; कोई नकली पहचान-पत्र या बिल्ला साथ रखना महत्वपूर्ण नहीं है।
तथ्य: यह धारा ‘वेश-भूषा’ (garb) और ‘चिह्न/प्रतीक’ (token) — जैसे बिल्ला या पदक — दोनों को कवर करती है जो असली सैनिकों के उपयोग जैसी प्रतीति कराते हों; अतः यदि छल के लिए इस्तेमाल किए जाएँ तो नकली बिल्ले या पदक पर भी कार्यवाही हो सकती है।