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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 138

repealed

Abetment of act of insubordination by soldier, sailor or airman

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

सैन्य अनुशासन कमान‑श्रृंखला के सम्मान पर टिका है। औपनिवेशिक काल में बनाए गए भारतीय दंड संहिता (IPC) में सशस्त्र बलों के अनुशासन की रक्षा हेतु कई धाराएँ (धारा 131–138) जोड़ी गईं, जो केवल राजद्रोह/विद्रोह (म्यूटिनी) ही नहीं, बल्कि अधीनता‑भंग के अभिप्रेरण जैसे हल्के कृत्यों को भी अपराध घोषित करती हैं। धारा 138, धारा 131 के अंतर्गत आवृत पूर्ण म्यूटिनी की तुलना में हलके प्रकार के हस्तक्षेप को लक्ष्य करती है—यह आदेशों की अवज्ञा के लिए रोज़मर्रा के उकसावों को संबोधित करती है, यह मानते हुए कि सुचारु सैन्य व्यवस्था को कमान‑ढाँचे में छोटे‑मोटे व्यवधानों से भी सुरक्षा चाहिए।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: केवल सैनिकों को ही इस क़ानून के तहत दंडित किया जा सकता है।

    तथ्य: सैनिक ही नहीं, कोई भी व्यक्ति—असैन्य नागरिक सहित—जो अधीनता‑भंग का अभिप्रेरण (उकसावा/सहायता) करता है, इस धारा के तहत दंडित हो सकता है।

  • मिथक: सिर्फ़ अवज्ञा के लिए उकसाना ही सज़ा के लिए काफी है, भले ही कुछ हुआ न हो।

    तथ्य: क़ानून की माँग है कि वास्तविक अधीनता‑भंग का कृत्य अभिप्रेरण ‘के परिणामस्वरूप’ घटित हो—केवल प्रोत्साहन देना, पर उसके बाद अधीनता‑भंग न होना, इस विशेष धारा की शर्त पूरी नहीं करता।

  • मिथक: यह धारा म्यूटिनी को कवर करती है।

    तथ्य: म्यूटिनी अधिक गंभीर अपराध है, जो अलग से IPC धारा 131 में आवृत है; धारा 138 साधारण अधीनता‑भंग के अभिप्रेरण जैसे कम गम्भीर अपराध को कवर करती है।