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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 137

repealed

Deserter concealed on board merchant vessel through negligence of master

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान ब्रिटिश भारत के उपनिवेशकालीन दौर में सैन्य अनुशासन और भगोड़ेपन की चिंताओं से निकला था। वाणिज्यिक पोत भगोड़ों के लिए गुपचुप निकल जाने का आम जरिया थे। जहाज़ के कप्तानों पर बुनियादी चौकसी और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी डालकर, कानून का उद्देश्य इस भागने के रास्ते को बंद करना था, बिना यह साबित किए कि कप्तान ने जानबूझकर भगोड़े की मदद की थी — केवल लापरवाही ही दंडनीयता के लिए पर्याप्त मानी गई।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: यह कहना गलत है कि दंड के लिए कप्तान को भगोड़े के बारे में पता होना अनिवार्य है।

    तथ्य: यह धारा साफ कहती है कि यदि कप्तान की अनभिज्ञता उसकी खुद की लापरवाही या जहाज़ के कमजोर अनुशासन से उपजी हो, तो छुपाए जाने की जानकारी न होने पर भी उस पर जुर्माना किया जा सकता है।

  • मिथक: यह कोई अत्यंत गम्भीर आपराधिक अपराध नहीं है जिसमें कड़ी सजा दी जाती हो।

    तथ्य: दंड केवल जुर्माने का है, जिसकी अधिकतम सीमा पाँच सौ रुपये है; यह दर्शाता है कि इसका स्वरूप कठोर आपराधिक दंड के बजाय एक विनियामक/प्रशासनिक दंड जैसा है।