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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 134

repealed

Abetment of such assault, if the assault committed

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान औपनिवेशिक काल के भारतीय दंड संहिता 1860 से आया है, जिसमें सैन्य अनुशासन और पदानुक्रम की विशेष सुरक्षा शामिल थी। क्योंकि सशस्त्र बल कड़े कमान-शृंखला पर निर्भर करते हैं, कानून वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध हिंसा भड़काने को गम्भीर अपराध मानता है और भले वास्तविक आक्रमण किसी और ने किया हो, उकसाने वाले को भी आपराधिक रूप से उत्तरदायी ठहराता है। यह व्यापक विधिक सिद्धान्त को दर्शाता है कि सैन्य अनुशासन के विरुद्ध कुछ गम्भीर कृत्यों की उकसाहट (एबेटमेंट) स्वयं कृत्य के समान दंड की अधिकारी हो सकती है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: सिर्फ़ वही व्यक्ति दंडित किया जा सकता है जो शारीरिक रूप से आक्रमण करता है।

    तथ्य: कानून उस किसी व्यक्ति को भी दंडित करता है जो आक्रमण के लिए उकसाता, भड़काता या उसकी व्यवस्था में मदद करता है—बशर्ते कि वही उकसाहट आक्रमण के वास्तव में होने का कारण बनी हो।

  • मिथक: यह धारा हर कार्यस्थल पर होने वाले आक्रमणों पर लागू होती है।

    तथ्य: यह विशेष रूप से सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना, वायु सेना) के कार्मिकों द्वारा ड्यूटी पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारी के विरुद्ध किए गए आक्रमणों पर लागू होती है।