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सं Samvidhan

Indian Penal Code, 1860

धारा 133

repealed

Abetment of assault by soldier, sailor or airman on his superior officer, when in execution of his office

सत्यापन प्रतीक्षित

यह क्यों है

यह प्रावधान औपनिवेशिक काल की उस चिंता से निकला है जिसमें सशस्त्र बलों में कड़ी अनुशासन व्यवस्था और कमान शृंखला को बनाए रखना अहम माना गया। उच्च अधिकारी पर हमला सैन्य अनुशासन और कमान शृंखला को खतरे में डालता है, इसलिए कानून ने न केवल स्वयं हमले (जिसका प्रावधान अलग है) को, बल्कि ऐसे हमले के लिए उकसाने या सहायता करने के कृत्य को भी दंडनीय माना है, क्योंकि उकसाने वाला भी प्रहार करने वाले जितना ही खतरनाक हो सकता है।

आम गलतफहमियाँ
  • मिथक: केवल वही व्यक्ति दंडित किया जा सकता है जो शारीरिक रूप से अधिकारी पर हमला करता है।

    तथ्य: यह धारा विशेष रूप से उन लोगों को दंडित करती है जो हमले का उकसावा (प्रेरणा, सहायता या भड़काना) करते हैं, भले वे स्वयं शारीरिक रूप से भाग न लें।

  • मिथक: यह कानून किसी भी सरकारी अधिकारी पर नागरिकों द्वारा किए गए हमलों पर लागू होता है।

    तथ्य: यह धारा केवल सशस्त्र बलों (थल सेना, नौसेना, वायु सेना) के कर्मियों द्वारा अपने उच्च अधिकारियों पर, उनके आधिकारिक कर्तव्य के दौरान, किए गए हमलों तक सीमित है।